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188 परिवारों को है 25 साल से छत का इंतजार
कश्मीरमें आतंकियों से तंग आकर 188 पंडित परिवारों ने दिल्ली का रूख किया। बात सन 1990 की है जब उन्हें बेरी रोड पर करीब 12 एकड़ जमीन खरीदी। तब यह स्थान जंगल के रूप में था। प्रवासी कश्मीरियों ने यहां कई बार कॉलोनी तैयार करने का प्रयास किया। सन 1995 में हुडा विभाग ने उनकी जमीन का अधिग्रहण कर उन्हें सेक्टर-2 में प्लॉट देने का आश्वासन दिया। बाद में सीटीपी (चीफ टाउन प्लानर) ने हुडा के आश्वासन पर अपनी हामी की मुहर भी लगा दी। और सन 2002 में उनकी 12 एकड़ की जमीन रिलीज कर 2003 में चीफ टाउन प्लानर ने 188 प्लाटों की ड्राइंग को पास कर दिया।
शुल्क भी जमा
साल2007 में पोजिशन लेटर जारी करने के आदेश दिए गए। इस बीच हुडा ने विकास के नाम पर इन परिवारों ने करीब चार करोड़ रुपया वसूला। जिसे विभाग ने आवश्यक सुविधाओं के नाम पर खर्च किया। उसके बाद भी जब प्लाट नहीं मिले तो सन् 2012 13 में भी सीटीपी के साथ बैठक की। उस समय हुडा की मुख्य प्रशासक सुप्रभा दहिया ने भी इनके हक जायज मानते हुए तत्काल अलाटमेंट लेटर जारी करने का आदेश दिया था।
26 प्लाटों से फंसा पेच
दरअसल2011 में बहादुरगढ़ की एक पार्टी ने लोकायुक्त के पास शिकायत दर्ज करवाई कि इसी जमीन पर उसके भी 26 प्लाट हैं। कानूनन उन्हें उनके प्लाटों का भी पजेशन दिया। जिस पर लोकायुक्त ने 10 जुलाई 2012 को हुडा प्रशासन को निर्देश दिया कि वो सारी स्थिति की जांच कर इस मसले का निपटारा करें। तब से लेकर हुडा विभाग के अधिकारियों ने इसे लटका दिया है। कश्मीरी पंडित पीएस मिस्किन ने बताया कि उनकी सारी औपचारिकता पूरी हो चुकी हैं और वे डेवलपमेंट चार्ज तक जमा करवा चुके हैं और सारी चीजें उनके हक में हैं, जबकि ऑब्जेक्शन करने वाली पार्टी के पास कोई डॉक्यूमेंट नहीं है। ऐसे में उन्हें कब्जा नहीं दिया जा रहा है और उन्हें अपने ही देश में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
^हमने 22 साल पहले शेरसिंह से जमीन खरीदी थी। बाद में हुडा ने प्लाट के बदले प्लाट की स्कीम पर उनकी जमीन को सेक्टर-2 में शामिल कर लिया। सभी 188 परिवारों ने हुडा की सारी शर्तें पूरी कर रखी है और हमें पजेशन लेटर तक मिल चुका है। अब अधिकारियों ने हमसे पूरी जमीन का मुटेशन हुडा के नाम करवाने को कहा है। जबकि सभी आवेदन कई साल पहले ही मुटेशन के लिए एफीडेविट हुडा के पास जमा करवा चुके हैं। कुछ लोग अप