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इधर, राम बारात निकली, और सुदामा चिपके रहे फोन पर

7 वर्ष पहले
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हरबार की तरह झज्जर में होने वाले रामलीला उत्सव के तहत शनिवार को राम बारात निकाली गई। वृदांवन से आए कलाकारों ने विभिन्न देवी-देवताओं के रूप में राम बारात का आकर्षण बढ़ाया। इस दौरान कई कलाकार अपने मोबाइल फोन से भी बात करते रहे, जो दर्शकों के आनंद चर्चा का केंद्र रहा। कृष्ण और राधा के साथ बैठा कलाकार सुदामा तो समूचे रास्ते फोन पर ही बात करता आया।

राम बारात बहादुरगढ़ रोड स्थित रामलीला मैदान से शुरू हुई। इसके बाद शहर के विभिन्न बाजारों और प्रमुख चौराहों से होते हुए वापस प्राचीन रामलीला मैदान में आई। कई जगह राम बारात का स्वागत किया गया। झज्जर जिले की इस रामलीला को देखने आसपास के शहरों से भी दर्शक आते हैं।

इससे पूर्व रामलीला कमेटी द्वारा निकाली गई राम बारात को संतोख धनखड़, मुन्ना हरित ने रवाना किया। समूचे आयोजन में, गौरव पाराशर,आजाद दीवान, सुभाष दीवान, वेदप्रकाश, जयभगवान मित्तल, किशन मदान, तिलक राज गौसाई पूर्व पार्षद,जयगोविंद लालचंद गर्ग का सहयोग रहा।

200साल से हो रहा है झज्जर में आयोजन

झज्जरमें रामलीला कमेटी का आयोजन पिछले 200 सालों से हो रहा है। रामलीला का ये उत्सव मुगलकाल से अब जारी है। झज्जर के नवाब के दीवान रहे पं. राम रिछपाल ने इसकी शुरूआत की थी। उस समय झज्जर के नवाब भी रामलीला देखने प्राचीन रामलीला मैदान में आते थे। इसी मैदान पर अब भी रामलीला होती है। इसके बाद उनके पुत्र दीवान दिलावर सिंह ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। दीवान दिलावर स्वतंत्रता सेनानी रहे। इसके अलावा रोहतक जिले के पहले डीपीआरओ और संयुक्त पंजाब पहले एमएलसी भी रहे। उनके घर मोहल्ला कानूनगो,मोहल्ला खारीकुई से ही राम बारात निकाली जाती थी,जो अब भी जारी है। उनके बाद रामलीला कमेटी की रिवायत को राम रिछपाल ने आगे बढ़ाया। इसके बाद रामलीला कमेटी का गठन हुआ,अब इसके द्वारा ये उत्सव मनाया जाता है।

विजय दशमी तक ये रहेंगे रामलीला के आकर्षण

28सितंबर: रामवनवास,नाव लीला,राम के वट संवाद, भरत मिलाप

29सितंबर: श्रीरामकी चरण पादुका लाना, सूर्पणखा की नाक काटना,खरदूषण वध,राम का स्वर्ण मृग के पीछे जाना

30सितंबर:-सीताहरण,जटायु मरण,रामका शबरी के यहां जाना,

1अक्टूबर: श्रीरामसुग्रीव मित्रता,बाली वध,हनुमान द्वारा सीता का पता लगाना

2अक्टूबर:लंका दहन,सेतुमार्ग बनाना, विभीषण, अंगद, रावण संवाद,लक्ष्मण मूर्छित