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अधिकारी बोले, पार्किंग िनर्माण में आड़े नहीं रहे
निर्दोष पेड़ों को बचाने के लिए सामाजिक संस्थाएं आगे आई
भास्करन्यूज| बहादुरगढ़
मेट्रोको ट्रांसफर की गई जमीन पर खड़े 29 पेड़ों की कटाई के मामले में विरोध के बाद सोमवार को मेट्रो अधिकारियों ने पेड़ काटने के मुद्दे पर हाथ खड़े कर लिए हैं। वहीं वन विभाग ने भी इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला मानते हुए अपने को मजबूर बताया। सोमवार को मेट्रो अधिकारियों ने ये साफ कर दिया कि पार्किंग की जगह में खड़े पेड़ उनके निर्माण में आड़े नहीं रहे हैं।
इसलिए हरे भरे पेड़ों को काटने की कोई रिक्वेस्ट उन्होंने तो वन विभाग को की और ही पर्यटक निगम को। वहीं शहर की कई संस्थाएं भी पेड़ों को बचाने की मुहिम शुरू कर दी है और पूरा मामला पर्यटक निगम की एमडी और डीसी के संज्ञान में लाया गया है।
मेट्रोने बचाएं 6000 पेड़
मेट्रोअधिकारियों के मुताबिक फर्स्ट फेज से लेकर अब नए मेट्रो स्टेशन और नई मेट्रो लाइन बनाने के लिए फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से जितने पेड़ काटने की परमिशन मिली, डीएमआरसी ने उससे करीब साढ़े 6 हजार पेड़ कम काटे हैं। कई पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसप्लांट भी किया गया। डीएमआरसी ने ही देश में पहली बार एक खास तरह की तकनीक से बड़े-बड़े पेड़ों को जड़ समेत निकाल कर एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर ट्रांसप्लांट करने का काम शुरू किया था।
डीएमआरसी के अधिकारियों के मुताबिक मेट्रो जो पेड़ ट्रांसप्लांट करती है, उनकी मॉनिटरिंग भी की जाती है। इसके अलावा मेट्रो के डिपो, साइट ऑफिस, रेजिडेंशियल कॉलोनी और ट्रेनिंग स्कूल समेत कई अन्य जगहों पर भी बड़ी तादाद में ग्रीनरी डेवलप की जा रही है।
नॉन फॉरेस्ट एरिया
^येनॉन फॉरेस्ट एरिया के पेड़ हैं और इन पर पूरी तरह से पर्यटक निगम का ही अधिकार है। अपने इस्तेमाल के लिए कोई भी डिपार्टमेंट पेड़ काट सकता है। वन विभाग से उन्होंने सिर्फ इन पेड़ों की वैल्यू लगवाई थी और परमिशन जैसी कोई बात नहीं है। अगर पेड़ काटने से किसी को आपत्ति है और वन विभाग को शिकायत मिलती है, तो हम मामले की जांच पड़ताल करवाएंगे। अगर जरूरी हुआ तो पेड़ों की कटाई रोकी जा सकती है। सतवीरसिंह, डीएफओ
गैर जरूरी पेड़ नहीं काटती मेट्रो
^मेट्रोनिर्माण के दौरान किसी भी गैरजरूरी पेड़ को नहीं काटा जाता। इसी को बहादुरगढ़ में भी फॉलो किया जा रहा है और हमने किसी भी पेड़ को काटने की रिक्वेस्ट नहीं