मौसम की बेरुखी से किसान चिंितत
भास्कर न्यूज|नारनौल/ गोदबलाहा
बुजुर्गकहते हैं माह पौ का जाड्डा ऊंट भी गेर ले आडा। इसका बड़ा गूढ अर्थ है। ऊंट के शरीर पर ऊन होने के कारण उसको सर्दी कम लगती है। माघ और पौष महीना सर्दी का चरम होता है। इनमें ऊंट भी सर्दी के आगे बेबस हो जाता है। तीन दिन पहले पौष भी लग चुका है, लेकिन सर्दी सुबह शाम ही हो रही है। ठंड कम होने से सबसे ज्यादा नुकसान फसलों को हो रहा है। गेहूं सरसों की ग्रोथ रुक गई है।
गेहूंऔर सरसों की फसल प्रभावित
सर्दीकम होने के कारण गेहूं और सरसों की फसल सबसे अधिक प्रभावित हो रही है। इन फसलों को कम तापमान की आवश्यकता रहती है। कृषि विभाग नारनौल के सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी डॉ हरपाल के अनुसार इन दिनों में गेहूं, चना सरसों की फसल की अच्छी बढ़वार फुटाव के लिए दिन का औसत तापमान 13 डिग्री या इससे कम होना चाहिए। लेकिन फिलहाल औसत तापमान इससे 2 से 5 डिग्री तक अधिक रहा है। 4 दिसंबर को अधिकतम तापमान 26 और न्यूनतम 10 डिग्री तथा दिन का औसत तापमान 18 डिग्री रहा। खास बात यह है कि न्यूनतम तापमान जो 5 डिग्री तथा अधिकतम 15 से 18 डिग्री के आस पास होना चाहिए वह इससे 2 से 4 डिग्री तक अधिक बना हुआ है। तापमान अनुकूल नहीं होने के कारण पौधे में कोशिकाओं को विस्तार नहीं हो पाता। इस कारण तो उनमें ढंग से फुटाव होता और ही वृद्धि होती है।
2011 में भी बन चुके हैं ऐसे हालात
यहपहली बार नहीं हो रहा है कि सर्दी दिसंबर माह के महीने में भी दस्तक नहीं दे रही है। इससे पहले वर्ष २०११ में भी इसी प्रकार के हालात बन चुके हैं। वर्ष 2011 में भी आधा दिसंबर बीत जाने के बाद ही हल्की बूंदाबांदी के बाद ही सर्दी बढ़ी थी। बढ़े तापमान के साथ साथ किसानों की चिंता भी बढ़ रही है। किसान सुखबीर यादव, हरीश, कुलदीप, हर्ष, हरिराम आदि का कहना है कि फसलों की बढ़वार रुक गई है। अगर यही हाल रहा तो गेहूं कुछ ही दिनों में बाली निकाल लेंगे। यही हाल अन्य फसलों का होगा। हालात ये हैं कि दोपहर के समय खेत की मिट्टी गरम महसूस होती है। जो अच्छा संकेत नहीं है।
सिंचाई अवश्य करें : डीडीए
कृषिविभाग नारनौल के उपनिदेशक डॉ बलवंत सहारण का कहना है कि किसान गेहूं की फसल 21 दिन की होते ही सिंचाई अवश्य करें। इसी प्रकार 25 दिन की होती ही सरसों में सिंचाई करें। समय पर सिंचाई से जमीन का तापमान नहीं बढ़ पाएगा। खरपतवार निकालने के