पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • सुख दुख जीव अपने कर्म का फल : आचार्य अजय

सुख दुख जीव अपने कर्म का फल : आचार्य अजय

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
अयोध्यासे आये आचार्य अजय जी महाराज ने शुक्रवार को कहा कि मानवता वादी सिद्धांत का पूर्ण परि पालन करते हुए राम जी सब को प्रसन्न रखने का प्रयास करते है। अपने माता पिता गुरुजनों को आदर से प्रणाम करते है और अयोध्या राज्य की साधारण जनता के प्रति अगाध स्नेह और आदर का भाव उन्हें समस्त अवध राज्य के प्रत्येक नागरिक को इतना भाता है कि वे सभी राम के दीवाने हो गये है।

संसारमें चार प्रकार के दुख

श्रीसनातन धर्म सभा द्वारा पार्क गली बागेश्वर मन्दिर में चल रही कथा में उन्होंने कहा कि कोई दुख और सुख नहीं देता जीव अपने कर्म का फल भोगता है और वो जीवन भर पछताता है संसार में चार प्रकार के दुख है, काल कर्म के दुख को रोक नहीं सकते लेकिन यदि प्रयास करे तो स्वभाव और गुणों के द्वारा दिये गये दुख को रोका जा सकता है मंथरा के स्वभाव ने खुशियों से भरे माहौल को गमगीन बना दिया कैकेयी का स्वभाव, महाराज दशरथ का स्वभाव उन्हें दुख दे रहा है।

कथा वाचक ने कहा कि मेरे राम का स्वभाव उनको कभी दुखी नहीं कर सकता वो सदा मुस्कराते नजर आते है। अजय जी ने कहा कि प्रीति करना बुरा नहीं है लेकिन प्रीति का अतिरिक हो जाने पर पाकर भी पाया नहींं लगता खोकर भी खोया नही लगता यही कभी देवी कैकेयी को राम को वनवासी बना देता है जिससे अपार प्यार करती थी उसी को वनवासी वना कर कठोरता का परिचय दिया शायद उनको लगता है कि राम उनको मां से अधिक प्यार देते है लेकिन है तो कौशल्या नंदन।