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राम ने ताड़का का किया वध

7 वर्ष पहले
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नारायणसेवा समिति की ओर से श्री कृष्णा ड्रामेटिक क्लब अनाज मण्डी के रंगमंच पर मंगलवार रात भगवान जन्म से लेकर ताड़का वध करने तक की लीला दिखाई गई।

मंचन के दौरान जब राम का जन्म हुाअ तब खूब पटाखे चलाए गए। भए प्रकट कृपाल दीनदयाल कौशल्या हितकारी। भगवान राम के जन्म के बाद उनकी बाल लीला का भी चरित्र चित्रण किया गया। बाद में महामुनि विश्वामित्र राक्षसों से अपने यज्ञ का रक्षा के लिए महाराज दशरथ से राम-लक्ष्मण को मांग कर ले गए। इस अवसर पर दशरथ और विश्वामित्र के संवाद से दर्शक भाव-विभोर हो गए।

महाराज दशरथ के कुल गुरू ऋषि वशिष्ठ ने दशरथ को समझाया कि राम ने-विप्र धुन सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार। वन में यज्ञ की रक्षा कर ताड़का का वध किया। जिसमें दशरथ-संजय, विश्वामित्र रगबीर सैनी, राम-हार्दिक, लक्ष्मण-पार्थ, भरत-हर्ष, शत्रुधन कल्पित, कौशल्या-कीर्ति निर्मल, मारीच-ओम प्रकाश यादव, सुबाहु-जगदीश बिल्ला, ताड़का-वेद प्रकाश सैनी दारपाल-महाबीर बागड़ी ने अभिनय किया।

रावण-बाणासुर संवाद का मंचन

श्रीधार्मिक रामलीला ट्रस्ट,चांदुवाड़ा के रंगमंच पर मंगलवार रात्रि धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर, रावण-बाणासुर संवाद तथा लक्ष्मण परशुराम संवाद का शानदार मंचन किया गया। इस अवसर पर सर्व प्रथम राजा जनक का दरबार में धनुष यज्ञ तथा सीता के स्वयंवर का आयोजन किया गया। सीता के स्वयंवर में अनेक देशों के राजकुमारों ने भाग लिया। इस मौके पर महर्षि विश्वामित्र राम-लक्ष्मण के साथ यज्ञ शाला में प्रवेश करते हैं। सभी राजा दरबार में उपस्थित लोग राम-लक्ष्मण को देखकर अपनी-अपनी भावनाओं के अनुसार उनका दर्शन करते हैं।

महेंद्रगढ़. रामलीलापरिषद के रंगमंच पर रावण-वेदमती संवाद की लीला का दृश्य।