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डॉक्टरों की कमी से मरीज धक्के खाने को मजबूर

7 वर्ष पहले
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जिलामुख्यालय पर बने 100 बिस्तर के सरकारी अस्पताल में हर दिन करीब 500 से ज्यादा रोगी उपचार के लिए आते हैं। उनकी देखभाल के लिए पर्याप्त चिकित्सक ही नहीं हैं। जितने होने चाहिए, उनमें से आधे से ज्यादा पद खाली हैं। जिनकी तैनाती है, उनमें से अनेक हर दिन अदालती पेशी पर पाए जाते हैं। इतना ही नहीं, जिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की नारनौल में डयूटी लगाई थी, उनमें से आने को कोई तैयार ही नहीं।

रोजाना5 सौ से 6 सौ तक आेपीडी

चारमंजिला और 100 बेड वाले इस सामान्य अस्पताल में रोजाना औसतन 500 से 600 रोगी ओपीडी के लिए आते हैं। सामान्य अस्पताल में चिकित्सकों के स्वीकृत पदों में से दो तिहाई पद रिक्त हैं। इतना ही नहीं 100 बेड में से करीब 60-70 बेड ही इस्तेमाल में रहे हैं। साथ ही अस्पताल में आधुनिक लैब जरूरी उपकरणों की भी कमी है। अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार यहां चिकित्सकों के कुल 39 पद स्वीकृत हैं। लेकिन इनमें से 18 पदों पर ही चिकित्सकों की नियुक्ति की गई हैं। इनमें से भी तीन चिकित्सक बिना बताए लंबे समय से गैर हाजिर चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार विभाग चाह कर भी बिना बताए गैर हाजिर चलने वाले चिकित्सकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने में असमर्थ है।

ठीकनहीं है प्रसूति वार्ड की हालत : प्रसूतिवार्ड में रोजाना औसतन 30 से 35 केस डिलीवरी के लिए आते हैं, लेकिन प्रसूति वार्ड की देखभाल का जिम्मा केवल एक महिला चिकित्सक पर है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने महिला चिकित्सकों को प्रतिनियुक्ति के आधार पर यहां लगाया हुआ है। लेकिन हालात यह है कि जिस दिन वे अपने पीएचसी को छोड़कर यहां आती हैं, उस दिन ग्रामीण केंद्रों का कमा भी प्रभावित होता है। इतना ही नहीं इस वार्ड में आधुनिक उपकरणों बिस्तर का भी अभाव है। इसके चलते डिलीवरी के लिए आने वाली महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या से सिविल सर्जन को कई बार स्थिति से अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन चिकित्सकों की कमी के चलते समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

नारनौल . सामान्यअस्पताल में मरीजों की लगी लाइन।