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जांच पूरी होने तक निलंबित रहेंगी नगर परिषद प्रधान अंजना अग्रवाल
शहरीस्थानीय निकाय विभाग के निदेशक द्वारा अगस्त माह में निलंबित की गई नारनौल नगर परिषद प्रधान अंजना अग्रवाल की अपने पद पर बहाली की उम्मीदों पर गुरुवार को पानी फिर गया। अपने निलंबन आदेश के खिलाफ विभाग के प्रधान सचिव के दरबार में दायर की फरियाद पर गुरुवार सुबह चंडीगढ़ में सुनवाई करते हुए प्रधान सचिव ने प्रशासन द्वारा की जा रही रेगुलर इंक्वायरी के पूरा होने तक प्रधान का निलंबन जारी रखने के आदेश दिए। इन आदेशों पर नाराजगी जताते हुए प्रधान ने अब अपनी कुर्सी पाने के लिए अदालत में जाने की तैयारी कर ली है।
यहां बताते चले कि नगर परिषद प्रधान के खिलाफ विशेषाधिकार नियम 35 का दुरुपयोग करने, गलत एनओसी जारी करने जैसे अनेक मामलों के सामने आने पर 7 जून को प्रशासन ने प्रधान उसके पति के विरुद्ध शहर पुलिस थाने में केस दर्ज करवाया था। उसके बाद प्रधान को उसके पद से विभाग के निदेशक ने 20 जून को निलंबित कर दिया था। एडीसी के अलावा रोहतक पुलिस की क्राइम ब्रांच इस मामले की जांच कर रही है। हालांकि प्रधान ने अपने निलंबन को चुनौती देते हुए एक बार पद पर बहाली के आदेश प्राप्त कर लिए थे, किंतु जब दोबारा मामले की सुनवाई निदेशक ने की तो प्रधान को फिर से निलंबित कर दिया गया। उसी मामले में गुरुवार को नए वित्तायुक्त प्रधान सचिव एसएन राय ने चंडीगढ़ में सुनवाई की थी।
जरूरत पड़ने पर ली जाएगी अदालत की शरण
वित्तायुक्तने मामले की सुनवाई के दौरान हमारी बात को सही तरीके से नहीं सुना। मेरा कहना यह है कि जो भी आरोप प्रशासन ने मुझ पर लगाकर केस दर्ज करवाया है, वह गलत हैं। विपक्षियों द्वारा की गई झूठी शिकायत पर यह मामला दर्ज करवाया गया था। मैंने उन्हीं कागजों पर अपने हस्ताक्षर किए, जो अधिकारियों ने मेरे सामने प्रस्तुत किए। प्रधान सचिव के इस फैसले पर अपने कानूनी सलाहकार से विचार-विमर्श के बाद जरूरत पड़ने पर उच्च अदालत की भी शरण ली जाएगी।
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वित्तायुक्त ने कहा चार्ज गंभीर, जांच पूरी होने दो
जानकारीके अनुसार सुबह करीब 11 बजकर 10 मिनट पर एफसी एसएन राय ने प्रधान को अपने कार्यालय में बुलवाया। उनके वकील द्वारा इस बात पर ज्यादा जोर दिया गया कि जो आरोप लगाए गए हैं, वे जानबूझकर प्रधान के खिलाफ बनाए गए हैं। महिला होने के नाते अंजना अग्रवाल उन्हीं कार्यों पर हस्ताक्षर