टपका सिंचाई से पानी बिजली की बचत
जिलाउद्यान विभाग की ओर से गुरूवार धनोदा गांव में आईएचडी स्कीम के तहत सब्जियों में टपका सिंचाई मलचिंग सिट के महत्व पर खेत दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डीएचओ डाॅ. सुधीर यादव ने सब्जियों में टपका सिंचाई मलचिंग सिट के उपयोग उसके फायदों के बारे में मौके पर खेत में लगी टपका सिंचाई मलचिंग सिट को दिखाकर किसानों को विस्तार से बताया।
उन्होंने बताया कि टपका सिंचाई से पानी बिजली की बचत के साथ-2 फसल की पैदावार गुणवत्ता में बढ़ोतरी होती है। जिससे किसान को अपने उत्पादन का अच्छा रेट मिलता है साथ ही किसान को टपका सिंचाई विधि से रसायनिक खाद दवाई का प्रयोग भी कम होता है। जिससे किसान के खर्चों में कमी आती है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा किसानों को टपका सिचाई प्रणाली बागों सब्जियों में अपनानी चाहिए साथ ही विभाग इस विधि को अपनाने पर 60 प्रतिशत 70 प्रतिशत अनुदान भी देती है। जिला उद्यान अधिकारी ने मलचिंग सिट के फायदों के बारे में बताते हुए कहा कि मलचिंग सिट पौधे के लिए छाते का काम करता है और पौधे को अनुचित वातावरण से बचाता है साथ ही पानी बचाने में भी सहायक है और भूमि के तापमान को भी फसल के अनुसार रखता है। मलचिंग सिट खरपतवार को रोकने में लाभदायक है जिससे किसान का निराई-गुड़ाई में होने वाले खर्चे की बचत होती है। साथ ही मलचिंग सिट से गुणवत्ता पैदावार में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है।
किसानों को टमाटर बैंगन की फसल दिखाई
किसानोंको मौके पर लगी टमाटर बैंगन की फसल में दिखाया गया और किसान भी यह सब देखकर सहमत दिखे कि टपका सिंचाई मलचिंग सिट से सब्जियों बागों में बहुत फायदा होता है। विभाग द्वारा मलचिंग सिट पर भी 6400 रुपए प्रति एकड़ अनुदान दिया जा रहा है। इसके साथ-2 जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कहा की मलचिंग सिट टपका सिंचाई के फायदो को देखते हुए विभाग द्वारा हाईब्रिड सब्जियों के बीज पर भी अनुदान का प्रावधान किया गया है। जिसके तहत किसानों को प्रति एकड़ 8000 रुपए देने का प्रावधान है। यह अनुदान उन्हीं किसानों को दिया जाएगा जिन्होंने अपने खेत पर सब्जी की फसल में टपका सिंचाई मलचिंग का प्रयोग किया है। इस मौके पर विषय वस्तु विशेषज्ञ (टपका सिंचाई) डाॅ. मनदीप ने टपका सिंचाई के बारे में किसानों को विस्तार से बताया डाॅ. हरिपाल यादव, उद्यान विकास अधिकारी, नारनौल ने अन्य विभागी