राम ने दिया समरसता का संदेश
अयोध्यासे आए रामकथा वाचक आचार्य अजय ने कहा कि राम ने वनवास के दौरान समाज को समरसता का पहला संदेश दिया। वन में उन्होंने सबसे विशेषकर वनवासियों से मित्रता की, जिन्हें हम दलित कहते हैं।
श्री सनातन धर्म सभा द्वारा आयोजित पार्क गली बागेश्वर मन्दिर में रविवार रात उन्होंने कहा कि वनगमन के तत्काल बाद राम राज्य की नींव पड़ी। श्री राम ने वन मे रहने वाले सभी कोल, किरात, भील आदि अनुसूचित जन-जाति जिनको आज की भाषा में दलित कहते है। सबके मसीहा वन गये उन्होंने जाति पाति ऊंच नीच छुआ छूत जैसी विकृतियों को मिटाकर उनके वीच बैठकर जमीन में उनके साथ फल का भोजन और उनके हाथों से जल पिया इतना ही अपने जीवन का सबसे सच्चा मित्र वनवासियों के चौधरी निषादराज को बनाया।
उन सभी लोगो को अपने गले लगा कर यह सिद्घ कर दिया कि हम और तुम अलग नहीं है हम सभी भारत वासी एक है सभी लोगों को राष्ट्र भक्ति का संदेश दिया तथा उनको विश्वास दिलाया कि वे एक अच्छे मानव है सभी वन वासियों दलितों ने उन्हें अपना मसीहा मान लिया और कहा’ हे राम भैया हम एक स्वस्थ भारत का निर्माण करने में आपके साथ है। कथावाचक ने कहा राम जी कोई धन से या ऊंची जाति का टिंटोरा पीट कर नहीं मिलते वे तो भाव से मिलते है। आज हमारा भारत राष्ट्र जाति पाति के संघर्षों मे उलझा हुआ है। जरूरत है कि हम सभी लोगो को चाहे हिन्दू हो या मुसलमान सिक्ख हो या ईसाई किसी जाति या धर्म का हो। हमे एक दूसरे से नफरत नहीं करके एक सच्चे राष्ट्र भक्त का परिचय देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधर्म चाहे जितना शक्ति सम्पन्न क्यो हो एक एक दिन धर्म के सामने उसे हारना ही पड़ता है। हम भारत के लोग किसी आकृति की पूजा नहीं करते हम लोग पक्षी जटायु वानर, भालू का आदर करना जानते है और करते जिसका आचरण सुंदर है वही सच्चे अर्थों में इंसान है।