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आईटीआई भूमि पर 3 नवंबर तक नहीं होगी कोई कार्रवाई, हाईकोर्ट की रोक
शहरकी ब्वायज आईटीआई की जमीन पर चला रहा विवाद अब कुछ समय के लिए थम जाएगा। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 3 नवंबर तक इस मामले में कोई भी आगामी कार्रवाई होने पर रोक लगा दी है। जमीन अब वक्फ बोर्ड को जाएगी या नहीं, इस विवाद का निपटारा अब 3 नवंबर के बाद होगा तब तक निचली अदालत के आदेशों की पालना में जुटा प्रशासन भी विवादित भूमि की ना पैमाइश कर सकेगा, ना हीं इसका किसी को हस्तांतरण होगा।
येहै मामला : यहांबता दे कि खसरा नंबर 1196 1195 नंबर की 1 बीघा 13 बिस्वा जमीन के कब्जे को लेकर काफी समय से विवाद चला रहा है। अनेक सरकारी दस्तावेजों में खसरा नंबर 1196 1195 का उल्लेख आईटीआई की जमीन के तौर पर दर्ज है। जबकि वक्फ के रिकॉर्ड के अनुसार जमीन उसकी है। इसके नाम इसका इंतकाल 522 क्रमांक के तहत 29 अगस्त को हुआ था। वक्फ ने शहर के कुछ प्रभावशाली लोगों के नाम जमीन की लीज कर दी तब उसके कब्जे को लेकर यह सारा विवाद बढा।
भूमि पर आईटीआई प्रशासन, वक्फ बोर्ड और काश्तकार ने जताया दावा
आईटीआईब्वायज नारनौल की जमीन के खसरा नंबर 1196 का मालिकाना हक की कोर्ट में लड़ाई वक्फ बोर्ड जीत चुका है। इस फैसले के विरुद्ध आईटीआई प्रशासन ने हाईकोर्ट की शरण लेने के बाद काश्तकार भी हाईकोर्ट पहुंच गया। जानकारी के अनुसार गुरूवार सुबह जब इसकी सुनवाई हुई तो आईटीआई के वकील का कहना था कि इस मामले में 1970 के गजट नोटिफिकेशन 1989 के गजट नोटिफिकेशन में अलग- अलग तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं। 1989 के रिकॉर्ड में खसरा नंबर 1196 पर कब्रिस्तान दिखाया गया है, जबकि मुटेशन 5221 में इस भूखंड की केवल 2 बिस्वा जमीन पर ही कब्रिस्तान बना दिखाया गया है। जब जगह और नंबर एक है तो दो तथ्य कैसे हो सकते हैं। वक्फ की ओर से कहा गया कि आईटीआई प्रशासन की ओर से निर्धारित अवधि के दौरान याचिका दायर नहीं की गई। किंतु अदालत ने इसे ज्यादा महत्व नहीं दिया। हाईकोर्ट के इस निर्णय का असर स्थानीय अदालत के उस फैसले पर भी पड़ेगा जिसमें 16 सितंबर तक भूति पैमाइश ने होने पर सुनवाई के दौरान नायब तहसीलदार को 1 अक्टूबर से पहले अवैध कब्जे तोडकर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था।