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जनस्वास्थ्य कार्यालय में कबाड़ हो गईं सैकड़ों टंकियां
अधिकारियोंकी मनमानी के चलते सरकारी की महत्वाकांक्षी योजना जिस प्रकार दम तोड़ती है, इसका अंदाजा जनस्वास्थ्य विभाग कार्यालय में पिछले कई वर्षों से पड़ी-पड़ी कबाड़ हो चुकी 200 लीटर की पेयजल टंकियों पेयजल कनेक्शन पाइप की हालत को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है।
गौरतलब है कि सरकार ने अनुसूचित जाति के लोगों को जनस्वास्थ्य विभाग के माध्यम से नि:शुल्क पेयजल सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए लिए वर्ष 2006 में इंदिरा गांधी पेयजल योजना क्रियांवित की थी। इस योजना के तहत जिले के अनुसूचित जाति के परिवारों को जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से मुख्य पाइप लाइन से घर तक निशुल्क पाइप लाइन, नल की फिटिंग का सामान 200 लीटर वाली पानी की प्लास्टिक की टंकी उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। इस योजना को शीघ्र अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार ने जनस्वास्थ्य विभाग की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार प्लास्टिक की टंकियां, लोहे की पाइप लाइन नल की फिटिंग का सामान जनस्वास्थ्य विभाग, नारनौल कार्यालय में भिजवा दिए थे तथा पेयजल कनेक्शन लगाने तथा टंकियों का वितरण करने का काम कार्य जनस्वास्थ्य विभाग को सौंपा गया था, लेकिन जनस्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण पात्र लोगों को योजना का लाभ देने से करोड़ों रुपए कीमत की टंकियां लोहे की पाइप गर्मी, सर्दी बारिश में पड़ी-पड़ी कबाड़ हो गई हैं। 20 से 25 प्रतिशत लक्ष्य तक पहुंचते-पहुंचते अधिकारियों ने इस योजना की इतिश्री कर दी।जिले के 221 गांवों में निशुल्क पेयजल कनेक्शन देने का था
टंकियों के वितरण की नहीं जानकारी
अनुसूचितजाति के परिवारों के लिए जनस्वास्थ्य विभाग में आयी टंकियों का वितरण क्यों नहीं किया गया तथा नलों के कनेक्शन क्यों नहीं दिए गए, इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वे पिछले सप्ताह ही नारनौल में कार्यकारी अभियंता का पदभार संभाला है। वे इस मामले में विभागीय अधिकारियों से बातचीत करने के बाद ही कुछ बता पाएंगे, लेकिन यदि योजना का लाभ पात्र परिवारों को नहीं दिया गया तो वह गलत है। ऐसा नहीं होना चाहिए। फूलसिंह तंवर, कार्यकारीअभियंता जनस्वास्थ्य विभाग, नारनौल।
नारनेोल जन स्वास्थ विभाग में कई सालो से पडी पानी की टंकिया