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37 साल बाद माइनर की टेल तक पहुंचा पानी

6 वर्ष पहले
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शहरके एेतिहासिक जल महल शोभा सागर तालाब को अब आसानी से नहरी पानी से भरा जा सकेगा। इन दोनों स्थलों को जोड़ने वाली नारनौल माइनर में बनने के 37 वर्ष बाद पहली बार ट्रायल के तौर पर छोड़ा गया पानी टेल तक पहुंच गया है।

वैसे तो यह माइनर वर्ष 1954-55 में ओल्ड नारनौल डिस्ट्रीब्यूटरी के नाम से जोराशी बांध से निकाली गई थी। इसके साथ साथ मंडलाना डिस्ट्रीब्यूटरी भी बांध से निकाली गई थी। दोनों ही नहरें कच्ची थीं। बांध में जो सरप्लस पानी होता था उसे दोनों नहरों में छोड़ा जाता था। ओल्ड नारनौल डिस्ट्रीब्यूटरी का पानी नारनौल शहर मांदी गांव की सीमा से होते हुए कोजिंदा तक पहुंचता था। जबकि मंडलाना डिस्ट्रीब्यूटरी का पानी मंडलाना तक के खेतों में जाता था। समय बीतने के साथ साथ बांध में पहुंचने वाले पानी की मात्रा कम होती गई और दोनों नहरें भी समतल हो गई।

70के दशक में नहरी पानी पहुंचाने के लिए लिफ्ट सिस्टम चालू हुआ : 70के दशक में जिले में नहरी पानी पहुंचाने के लिए लिफ्ट कैनाल सिस्टम चालू हुआ तो वर्ष 1977-78 में ओल्ड नारनौल डिस्ट्रीब्यूटरी को पक्का करके इसको शहबाजपुर डिस्ट्रीब्यूटरी के पंप हाउस नंबर 1 से जोड़ दिया गया। यह पंप हाउस शहबाजपुर डिस्ट्रीब्यूटरी के किलोमीटर नंबर 3.800 पर स्थित है। हेडरीच से करीब 1.50 किलोमीटर का टुकड़ा उस वक्त किसी विवाद के चलते पक्का नहीं हो पाया था। इस कारण यह नहर चालू नहीं हो पाई। वर्ष 2013 में सिंचाई विभाग ने इस हिस्से को पक्का कराया। पक्का होने के बाद भी इसमें पानी नहीं छोड़ा गया। क्योंकि शहरी क्षेत्र बढ़ने तथा इसके साथ साथ गाइड बांध बनने के कारण माइनर में पानी की डिमांड नहीं रही।

नारनौलमाइनर की टेल कोजिंदा के पास

सिंचाईविभाग के जेई राजेश वर्मा ने बताया कि नारनौल माइनर में शनिवार को शहबाजपुर डिस्ट्रीब्यूटरी से 5 क्यूसिक पानी छोड़ा गया था। जो टेल तक पहुंच गया। दो चार जगह लीकेज थी, वो पानी चलने के साथ-साथ ठीक करवा दी हैं। माइनर की टेल 3.278 किलोमीटर पर कोजिंदा गांव के समीप कृष्णावती नदी के मुहाने पर है। माइनर की क्षमता 10 क्यूसिक की है।

बारिशका पानी किया जा सकेगा रिचार्ज : नारनौलमाइनर की टेल कृष्णावती नदी के मुहाने पर है। माइनर के साथ-साथ गाइड बांध बनाया गया है। जोरासी बांध में बारिश का पानी स्टोर होने पर उसको गाइड बांध में छोड़ा जा सकेगा तथा बांध से माइनर की सहायता से कृष्णावती नदी में रिचार्ज किया जा सकता है। इसी प्रकार बारिश के दिनों में नहर में जब फालतू पानी होता है तो उसको माइनर के माध्यम से गाइड बांध या कृष्णावती नदी में रिचार्ज किया जा सकेगा।

भू-जलस्तर होगा ऊंचा

बारिशकी कमी नहर में पानी नहीं आने के कारण भूमिगत जलस्तर काफी नीचे जा चुका है। माइनर में लगातार पानी चलने पर आस पास के कुओं ट्यूबवेलों का जल स्तर ऊंचा उठेगा। साथ ही माइनर के माध्यम से आस पास की 900 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई भी हो सकेगी।

मार्च से पहले दोनों स्मारकों में पानी भरवाने का प्रयास : विधायक

नारनौलके विधायक ओमप्रकाश यादव का कहना है कि मैंने शनिवार को नारनौल डिस्ट्रीब्यूटरी में पानी छुड़वाया था। पानी टेल तक पहुंच गया है। अब शोभा सागर तालाब में इससे पानी डलवाएंगे। इसके लिए जल्दी ही पाइप लाइन डलवाएंगे। जल महल के लिए नाला बना हुआ है। अगर जरुरत पड़ी तो पाइप लाइन डलवाएंगे। मेरा प्रयास है कि शहर के इन दोनों ऐतिहासिक स्मारकों को मार्च से पहले पानी से भरवाया जाए। इससे स्मारकों का सूखा खत्म होगा।

ये होगा लाभ

नारनौलमाइनर के चालू होने से शहर के शोभा सागर तालाब जल महल में पानी भरा जा सकेगा। शोभा सागर तालाब में पानी भरने के लिए माइनर से तालाब तक करीब सवा तीन किलोमीटर लंबी पाइप लाइन या नाला बनाना पड़ेगा। इसका एक बार प्रपोजल भी बना था, लेकिन नहर चालू नहीं होने के कारण यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई थी। इसी प्रकार जल महल में भी नाला या पाइप लाइन डालकर इस माइनर से पानी भरा जा सकेगा। जल महल में तो पहले पानी भरा भी गया है, लेकिन उस समय माइनर की बजाए शहबाजपुर डिस्ट्रीब्यूटरी का पानी गाइड बांध में डालकर उसको माइनर में लाया गया था। जो काफी कठिन कार्य है तथा पानी की वेस्टेज भी बहुत अधिक होती है। लेकिन अब सीधा माइनर से पानी छोड़ा जा सकेगा।

नारनौल . माइनरमें ट्रायल के तौर पर छोड़ा गया नहरी पानी। नारनौल का एेतिहासिक जलमहल