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हाईकोर्ट के आदेश के तीन साल बाद भी नहीं ढके कुएंं

7 वर्ष पहले
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अफसरशाहीके आगे उच्च न्यायालय के आदेश भी कोई मायने नहीं रखते। इस मामले में प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शुमार नारनौल भी पीछे नहीं है। इसी के चलते पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेशों के तीन साल बाद भी नारनौल में स्कूलों मुख्य रास्तों से सटे एवं घनी आबादी के बीच खुले पड़े सैकड़ों पुराने कुओं को देखने से ऐसा ही साबित होता है।

गौरतलब है कि गत एक दशक से देश भर के साथ-साथ हरियाणा में भी खुले बोरवेल में गिरने से हुई अनेक मासूमों की मौत हो चुकी है। इंसानों की छोटी-छोटी गल्तियों से मासूमों की मौत के चले सिलसिले से सबक लेते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने वर्ष 2011 में प्रदेश में खुले पड़े बोरवेल पुराने कुओं को लोहे के जाल बनवा बंद करवाने या मिट्टी से भरवाने के सख्त निर्देश दिए थे।

प्रशासनकी नाममात्र कार्रवाई

हाईकोर्ट के आदेशों के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने एक बार तो स्फूर्ति दिखाते हुए शहर का दौरा कर संबंधित अधिकारियों को खुले बोरवेल कुओं को ढकने के आदेश दिए थे। उस समय अधिकारियों ने नाम मात्र के कुओं पर लोहे के जाल ढकवा अपने कार्य की इतिश्री कर दी। जबकि शहर के मोहल्ला संघीवाड़ा, पुरानी सराय मिश्रवाड़ा में प्राथमिक स्कूलों मुख्य मार्गों के इर्द-गिर्द दर्जनों खुले कुएं खुले पड़े हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में तो ऐसे कुओं की भरमार है। सैकड़ों फुट गहरे इन कुओं में गिरने से एक साल के दौरान अनेक लोगों मवेशियों की अकाल मौत हो चुकी है। ऐसा नहीं है कि इन कुओं के कारण होने वाली घटनाओं के बारे में प्रशासन को जानकारी नहीं है, लेकिन जानकारी होने के बावजूद अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि अफसरशाही के आगे कोर्ट के आदेश भी कोई मायने नहीं रखते हैं।

कुएं 150 से 200 फुट गहरे

मास्टरसुरेश कुमार, राम सिंह, अशोक कुमार, कैलाशचंद हरिनारायण ने बताया कि शहर में पुराने कुएं बहुतायात में बनाए गए थे। इन कुओं की गहराई पहले 100 फुट हुआ करती थी, लेकिन जलस्तर नीचे गिरने से इनकी गहराई 150 से 200 फुट तक पहुंच गई। कुछ साल चलने के बाद भूमिगत जलस्तर 300 से 500 फुट नीचे तक पहुंच गया। इसके चलते अधिकांश कुएं नकारा हो गए।

शहर के मोहल्ला मोहल्ला संघीवाड़ा में चल रही राजकीय प्राथमिक पाठशाला के इर्द-गिर्द अनेक पुराने कुएं स्थित हैं। दो कुएं तो स्कूल की दीवार से बिल्क