40 गांवों की महापंचायत का तीन घंटे धरना
नांगलकालिया गांव में रहने वाली एक महिला के निष्कासन के मुद्दे पर हुई पंचायत के बाद गांव के सरपंच पर हुए हमले के आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होने से नाराज करीब 40 गांवों से अाए सैकड़ों ग्रामीणों ने बुधवार को उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना दिया। लघु सचिवालय में करीब तीन घंटे तक चले ग्रामीणों के इस प्रदर्शन के बाद आखिरकार डीसी-एसपी ने उनके प्रतिनिधिमंडल से बात करके समस्या का समाधान निकालने का आश्वासन दिया, तब ग्रामीण घर लौटे।
पूर्व निर्धारित घोषणा के अनुसार नांगल कालिया से सैकडों ग्रामीण सुबह 9 बजे महावीर चौक पहुंचे। वहां से उपायुक्त निवास के सामने से नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय में डीसी के कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। यहां उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के खिलाफ काफी देर तक नारेबाजी की।
ग्रामीणोंके आक्रोश को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात
ग्रामीणोंके आक्रोश को देखते हुए लघु सचिवालय में भारी संख्या में पुलिस दल बुलवा लिया गया। इनमें लाठी चार्ज दस्ता आंसू गैस के गोले चलाने वाली टीम भी शामिल थी। करीब 11 बजे डीसी ने खुद आने की बजाय ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात का समय दिया। तब भुंगारका के सरपंच राजेन्द्र प्रसाद के नेतृत्व में पांच लोगों की टीम ने डीसी से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि गांव की एक महिला अपने परिवार सहित अवैध रूप से शराब की बिक्री करती है और गलत कामों को अंजाम देती है। 5 जनवरी को मौजिज लोगों ने उसे समझाने की कोशिश की तो रात को महिला ने शरारती तत्वों को बुलाकर सरपंच अन्य गणमान्य लोगों पर हमला करवा दिया। अगले दिन जब पुलिस मौके पर नहीं पहुंची तो ग्रामीणों ने रोड जाम किया। तब पुलिस के कुछ कर्मचारियों ने महिलाओं से दुर्व्यवहार किया। इसके बाद पुलिस ग्रामीणों में झगड़ा भी हुआ।
कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने दिलाया महिला को घर दिलाया
ग्रामीणोंने आरोप लगाया कि नामजद महिला पिछले कई दशकों से अवैध कार्यों को बढ़ावा दे रही है। जिसने पटवार घर पर अवैध कब्जा करके आवासीय मकान बना लिया। गुस्साए ग्रामीणों ने कथित पटवार घर से महिला को बाहर निकाल दिया। पीडि़ता ने अदालत में मामला दायर किया। अदालती आदेशानुसार पुलिस द्वारा आरोपी महिला को दुबारा उसी मकान (पटवार घर) में बसाया गया। बीते दिनों नारनौल कोर्ट में नामजद महिला सरपंच तथा अन्य ग्रामीणों क