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डाउनलोड करेंरिटायरमेंट के दिन भी ट्रेन चला सिरसा पहुंचा उदयराम |
सिरसा रिटायर्ड होने के अंतिम दिन भी मन में ट्रेन चलाने की ही तमन्ना थी। हिसार से रेवाड़ी फाजिल्का ट्रेन का सिरसा के लिए जैसे ही समय हुआ। ट्रेन का चालक मनोज कुमार ट्रेन को चलाने के लिए तैयार हुआ। मगर बुधवार को रिटायर्ड हुए 60 वर्षीय ट्रेन के पायलट उदय राम ने कहा कि आज भी मैं ही ट्रेन चलाऊंगा यार। ये कहते हुए सिरसा की तरफ ट्रेन को दौड़ाना शुरू कर दिया। रिटायरमेंट के दिन भी ट्रेन चला सिरसा पहुंचा उदयराम
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बुधवार को सेवानिवृत्त हुए उदयराम बोले-36 साल पहले लोको पॉयलट भर्ती हुआ था। दो साल ट्रेन के पायलट का सह चालक रह और फिर नियमित हो गया। भगवान का शुक्र है कि कभी ट्रेन पटरी से नहीं उतरी। रोज सुबह ट्रेन का इंजन स्टार्ट करते ही भगवान से प्रार्थना करता था कि मेरे साथ हर यात्री का सफर मंगल ही करना भगवान। भगवान ने हर प्रार्थना सुनीं। पर दो महीने पहले ही एक घटना ताउम्र याद रहेगी। हुआ यूं था कि मैं जैसे ही ट्रेन सिरसा स्टेशन से बंठिडा की तरफ चलाने लगा, उसी दौरान एक युवती मोबाइल पर बात करती दिखाई दी। वह रेलवे लाइन पर थी और बातचीत में खोई हुई थी। मैं समझ गया कि कुछ करना होगा। मैंने तुरंत एमरजेंसी ब्रेक लगाए। ट्रेन झटके के साथ रूकने लगी। युवती से मुश्किल से दो हाथ के फासले पर ट्रेन रूक गई। मेरी सांसें रूकने को थी। युवती का ध्यान अचानक पीछे गया तो वह सन्न रह गई। मोबाइल उसके हाथ से गिर गया और पसीना पसीना हो गई। मैं भगवान का शुक्रिया अदा किया और युवती को लाइन से हटने का इशारा किया। युवती सदमे में थी, बड़ी मुश्किल से उसने अपना कदम आगे बढ़ाया। मैं अपने सफर पर चल पड़ा लेकिन जब तक जिंदगी रहेगी यह लम्हा हमेशा याद रहेगा। एक जिंदगी बचाने का सौभाग्य कोई भूल सकता है क्या।
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