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डाउनलोड करेंचंडीगढ़. हमने उन्हें अपने बेटे की बॉडी हैंडओवर की और उन्होंने हमें क्रिसमस ट्री का एक पौधा दिया। मानो हमने अपने पौधे बदल लिए। अब मेरा बेटा उनकी लैब में हमेशा जिंदा रहेगा और यह पौधा हमारे घर में। किश्वर अहमद शिराली क्रिसमस ट्री में अपने बेटे का अक्स देखती हैं पर उनकी आंखों में आंसू नहीं, गहरा सुकून झलकता है।
76 बरस की इस मां ने अपने बेटे अलिफ नीलेश शिराली की मौत के बाद उसका शरीर पीजीआई को डोनेट किया है। कितना मुश्किल रहा ये फैसला..? वे कहती हैं मुश्किल नहीं था। उसके शरीर को हम चिता के हवाले करें या कब्र में कीड़ों का भोजन बनाएं, इससे बेहतर है कि वो इसांन के काम आए। अब मैं कह सकती हूं, पहले मेरा बेटा वॉल स्ट्रीट में काम करता था, अब पीजीआई में एमएस स्टूडेंट्स को पढ़ाता है। यह मृत्यु के भी बाद का जीवन है।
किश्वर हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजी डिपार्टमेंट से रिटायर्ड हैं और उनके पति डॉ. सतीश शिराली पंजाब यूनिवर्सिटी के मैथमैटिक्स डिपार्टमेंट से। गहरे तक अध्यात्म से जुड़ीं किश्वर धर्म के उन सब मान्यतों को खारिज करती हैं, जिसमें कुछ संस्कार करने के बाद मृतक की आत्मा को शांति पहुंचाने या मुक्त होने की बात कही जाती है। वे कहती हैं, ‘हम इंसान होकर अगर इंसानियत के लिए कुछ नहीं कर पाए तो यह सबसे बड़ा अधर्म है।
इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म
परिवार, रिश्तेदार और समाज का नजरिया बॉडी डोनेशन को लेकर क्या रहा? किश्वर कहती हैं,‘मेरा परिवार फैसले में साथ था। रिश्तेदारों की संवेदनाएं मेरे पक्ष में रहीं और समाज को लग रहा था कि इस परिवार में मौत के बाद किसी तरह का शांति पाठ या रस्म क्रिया जैसा कुछ क्यों नहीं हो रहा। हमने उनका शुक्रिया अदा किया जो दुख में हमारे साथ थे, बाकी सबको बता दिया कि हमारा धर्म इंसानियत है, जो सबसे बड़ा है। इसमें किसी रस्म-रिवाज को माना नहीं जाता।’
पैसा बनाकर छोड़ जाना जीवन का मकसद नहीं
किश्वर धर्मशाला के पास मडहाउस बनाकर रहती हैं। वे हेल्प फाउंडेशन नाम का एनजीओ भी चलाती हैं, जो बच्चों के लिए काम करती है। वे मानती हैं कि जीवन का असली मकसद पैसा बनाकर उसे दूसरों के लिए छोड़ जाना नहीं, बल्कि कुछ ऐसा कर जाना है कि बाद में भी लोग आपको याद कर सकें, आपसे कुछ सीख सकें।
बेटे की मौत के दो दिन बाद अपडेट किया फेसबुक स्टेटस
हौसले और इंसानी जज्बे की मिसाल बनी यह मां 28 अप्रैल को फेसबुक वॉल पर लिखती है..अलिफ का 47वां बर्थडे 25 अप्रैल में था। 26 की सुबह वह हमें छोड़कर जा चुका था। हमने उसकी बॉडी पीजीआई को डोनेट कर दी है, जहां अब वह स्टूडेंट्स को पढ़ाएगा।
47 साल के अलिफ का 26 अप्रैल को निधन हो गया था
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