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डाउनलोड करेंभट्टूकलां। इंसान कितना भी बड़ा क्यों ना हो जाए, फिर भी उसके दिल में माता-पिता के प्रति अगाध प्यार भरा रहता है। उसी तरह ही जन्म स्थली भी व्यक्ति के लिए मां के समान होती है। जिसका प्यार मायानगरी में रहने के बाद भी कम नहीं हुआ। इसकी भीनी खुशबू उन्हें यहां खेंच लाती है।
ये यादगार पल शास्त्रीय संगीत में पद्ïम श्री व पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित जसराज ने अपने जन्म दिन पर केक काटने के उपरांत इलाकावासियों से शुभकामनाएं कबूलने के बाद दैनिक भास्कर के साथ विशेष बातचीत के दौरान साझे करते हुए बयां किए।
वे मंगलवार को अपने परिवार सहित अपने जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे। ये उनका 85वां जन्म दिवस है। विशेष बातचीत में पं. जसराज ने बताया कि गांव की मिट्टी से निकल कर वे चाहे कितनी बड़ी उपलब्धियों को छू लें लेकिन वे अपने बीते दिनों की यादों को कभी नहीं भूल सकते।
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