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गोपालदास को जबरन पीजीआई लाए, भड़के समर्थक उठा ले गए वापस

9 वर्ष पहले
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कुरुक्षेत्र/रोहतक. प्रदेश में गौचरान भूमि की बहाली की मांग को लेकर अनशन पर बैठे महंत गोपालदास को लेकर शुक्रवार देर शाम पीजीआई रोहतक में हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ। समर्थक महंत को ले यहां से उड़े और प्रशासनिक अधिकारी हाथ मलते रह गए। नौकरी जाने के डर से महंत के साथ कुरुक्षेत्र से आए पुलिस कर्मी चलती गाड़ी में कूद पड़े। शुक्रवार को कुरुक्षेत्र में अनशन पर बैठे महंत की हालात खराब होने के चलते पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने जबरन एंबुलेंस में डाला और एलएनजेपी अस्पताल में ले जाकर चेकअप कराया। उनकी खराब हालत को देखते हुए पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों की चार सदस्यीय टीम और ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए तहसीलदार सूरजभान शाम करीब छह बजे महंत को लेकर पीजीआई पहुंचे। चिकित्सकों ने उनके स्वास्थ्य की जांच की और भर्ती होने की बात कही, लेकिन उन्होंने भर्ती होने से इनकार कर दिया। घटना की सूचना पाकर हरियाणा गौशाला संघ रोहतक के प्रधान योगेंद्र आर्य अपने साथियों सहित पीजीआई पहुंच गए और समर्थक पुलिस से भिड़ गए। एएसआई सतीश ने महंत और उनके समर्थकों के पैर छूते हुए कहा, अगर उन्हें भर्ती नहीं कराया गया तो उनकी नौकरी चली जाएगी। बाद में समर्थकों ने महंत को सरकारी एंबुलेंस से उतारा और अपनी गाड़ी में बैठा कर कुरुक्षेत्र के लिए रवाना हो गए। जमकर हुआ हंगामा: एएसआई ने कहा कि महंत पुलिस हिरासत में हैं, इसलिए उनकी देख रेख की पूरी जिम्मेदारी पुलिस की है। समर्थकों ने उनसे पूछा की महंत को किस धारा के तहत गिरफ्तार किया गया है, तो एएसआई के पास कोई जवाब नहीं था। इस नाटकीय घटनाक्रम के तहत ड्यूटी मजिस्ट्रेट सूरजभान आपातकालीन विभाग में दुबके रहे। अनशन स्थल पर मरेंगे महंत के साथ आए ठाकुर गौतम सिंह और धनंजय सिंह ने पुलिस और ड्यूटी मजिस्ट्रेट को चेतावनी दी कि हम अस्पताल में नहीं, बल्कि अनशन स्थल पर प्राण त्यागना चाहते हैं। पुलिस बेवजह उन पर दबाव बना रही है। जब महंत भर्ती ही नहीं होना चाहते तो पुलिस उन पर दबाव क्यो बना रही है। ये है संतों की मांग तीन सप्ताह से प्रदेश सरकार के विरोध में बैठे संतों की मांग है कि प्रत्येक गांव में आरक्षित की गई गौचरान भूमि को छुड़वाया जाए ताकि बेसहारा गौ माता को बचाया जा सके। संतो का कहना है कि मांगें माने जाने पर गऊओं को गौतस्करों के हाथों से बचाया जा सकेगा और उन्हें सुरक्षित स्थान मिल सकेगा । उनके अनुसार सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकारों को आदेश दिए हैं कि गौचरान के लिए आरक्षित भूमि को मुक्तकिया जाए लेकिन प्रदेश सरकार उनके आदेशों की अवमानना कर रही है।

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