भास्कर लाइव: कितनी सुरक्षित हैं महिलाएं, खुद ही देख लीजिए...

9 वर्ष पहले
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गुडग़ांव. दिल्ली गैंग रेप के विरोध में उठी आवाज को देखते हुए गुडग़ांव पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए जो विशेष व्यवस्था करने के दावे किए थे, वे महज तीन हफ्ते में ही फुस्स हो गए। मामला अभी शांत हुआ भी नहीं है कि पुलिस आमजन की सुरक्षा के प्रति सुस्त हो गई।

शहर में महिलाओं के आवाजाही वाले स्थानों पर पुलिस की पीसीआर नजर नहीं आई रही है। जहां पीसीआर लगाई भी गई है, वह केवल खानापूर्ति साबित हो रही है।


दैनिक भास्कर टीम ने मंगलवार को शहर के कॉलेज, मॉल्स और मेट्रो स्टेशन का जायजा लिया। इसमें कुछ ही स्थानों पर पुलिसकर्मी नजर आए। अधिकतर स्थानों पर पुलिस उपस्थित नहीं थी।

महिला पीसीआर में पांच-पांच महिला पुलिस तैनात करने का पुलिस का दावा खोखला साबित हुआ। एक महिला पीसीआर में तो केवल एक महिला पुलिस तैनात पाई गई। ऐसे में महिलाओं को पुलिस पर शायद ही भरोसा होगा।


एमजी रोड पर सिर्फ एक महिला पीसीआर : नववर्ष के अवसर पर जहां ढाई किलोमीटर लंबे पूरे एमजी रोड पर पुलिस ही पुलिस नजर आती थी। अब हालात ये हैं कि इफको चौक से सिकंदरपुर मेट्रो स्टेशन तक केवल सहारा मॉल के बाहर ही एक महिला पीसीआर दिखी।

महिला सुरक्षा को लेकर अति संवेदनशील माने जाने वाले गुडग़ांव के एमजी रोड पर सहारा मॉल के अलावा किसी भी स्थान पर पुलिसकर्मी तैनात नजर नहीं आए।


दोपहर 2:05 बजे, स्थान एमजीएफ मेट्रोपोलिटन मॉल व एमजी रोड मेट्रो स्टेशन : एमजी रोड काफी संवेदनशील इलाका माना जाता है। इस रोड पर एक दर्जन से अधिक मॉल्स, आधे दर्जन से अधिक कॉमर्शियल बिल्डिंग और दो मेट्रो स्टेशन हैं।

यहां पर 31 दिसंबर 2011 की देर रात के समय एक युवती के साथ दर्जन भर युवकों द्वारा जानवरों जैसा व्यवहार किया गया था। इस रोड पर एमजी रोड मेट्रो स्टेशन के दोनों तरफ व मॉल्स के बाहर करीब 500 लोग आते-जाते नजर आए। मगर यहां पर लोगों की सुरक्षा के लिए एक भी पुलिसकर्मी तैनात नजर नहीं आए। कोई पीसीआर भी नजर नहीं आई।

'पीसीआर पर तैनात महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों को अपनी ड्ïयूटी सख्ती से निभाने के निर्देश दिए गए हैं। ड्ïयूटी के दौरान इनकी मुस्तैदी की चेकिंग की जाएगी। यदि ड्ïयूटी के दौरान कोई पुलिसकर्मी नदारद पाए गए तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।'

सुरेंद्र पाल सिंह

डीसीपी हेडक्वार्टर