कोटा। बायलॉज के तहत पंजीयन नहीं करवाने पर नगर निगम ने 4 साल में पहली बार कड़ा रुख अपनाते हुए शहर के सभी 158 मैरिज गार्डन को अवैध घोषित कर दिया। मंगलवार को निगम ने सभी मैरिज गार्डन संचालकों को नोटिस देकर 7 दिन की चेतावनी दी है। इस दौरान उन्होंने बकाया जमा करवाते हुए रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया तो निगम जयपुर की तर्ज पर मैरिज गार्डन सीज कर देगा।
शहर में स्थित मैरिज गार्डन को नियमों में बांधने के लिए नगर निगम ने नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 340 के तहत वर्ष 2010 में बायलॉज बनाए थे। वर्ष 2011 में निगम ने इन्हें लागू कर दिया। नगर निगम ने शहर में संचालित 158 मैरिज गार्डन के संचालकों से इसके तहत रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए आवेदन मांगे। रजिस्टर्ड होने पर हर 5 साल में रजिस्ट्रेशन शुल्क तथा हर साल अनुमति शुल्क जमा करवाना था। मैरिज गार्डन संचालकों ने शुल्क अधिक बताते हुए विरोध शुरू कर दिया और किसी ने रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया। निगम को चार साल पहले होने वाली लगभग 1.58 करोड़ रुपए तथा उसके बाद हर साल लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है।
ये है विवाद: मैरिज गार्डन संचालकों और नगर निगम के बीच विवाद केवल शुल्क को लेकर है। संचालकों का कहना हैं कि निगम ने जो शुल्क तय किए हैं वो काफी ज्यादा हैं। जयपुर में दरें कम की गई हैं। उसके अनुसार यहां पर भी इसे रिवाइज किया जाए। वहीं, निगम का कहना है कि दरें राज्य सरकार द्वारा तय की गई हैं। नगर निगम को इसे रिवाइज करने का अधिकार नहीं है। इस बात को लेकर अब तक दोनों पक्ष पत्र व्यवहार कर रहे थे।
ये है रजिस्ट्रेशन शुल्क
निगम ने शुल्क के लिहाज से मैरिज गार्डन को दो वर्गों में बांट रखा है। एक धार्मिक व दूसरे निजी मैरिज हॉल।
> मैरिज गार्डन का रजिस्ट्रेशन शुल्क 30 हजार । प्रत्येक 5 साल के लिए।
> अनुमति शुल्क निजी के लिए 25 रुपए वर्ग गज। प्रतिवर्ष देना होगा।
> अनुमति शुल्क धार्मिक के लिए 15 रुपए वर्ग गज। प्रति वर्ष देना होगा।
राजस्व समिति ने भी लौटाया
पिछले दिनों राजस्व समिति ने भी दरों में संशोधन पर असहमति व्यक्त कर मामले को वापस राजस्व अनुभाग को लौटा दिया।
^मैरिज गार्डन संचालकों को काफी समय से मोहलत दी जा रही थी। दरें रिवाइज नहीं हो सकती। इसी दर पर उन्हें पंजीयन करवाना होगा। यदि 7 दिन में वो पंजीयन नहीं करवाते हैं तो अब मैरिज गार्डन सीज कर दिए जाएंगे।
-रामेश्वर दयाल शर्मा, राजस्व अधिकारी नगर निगम