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1857 से पहले की है यह तिजोरी, नहीं खोल पा रहा कोई, कारीगरों के छूटे पसीने

6 वर्ष पहले
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करनाल / पानीपत । सन 1857 से पहले की तिजोरी में कहीं ऐसा इतिहास तो नहीं दबा पड़ा, जो शहरवासियों के लिए न केवल जानने योग्य हो, बल्कि ऐतिहासिक रूप से नई पीढ़ी के लिए जानकारीपरक भी हो। इसी उद्देश्य के चलते जिला प्रशासन ने शनिवार को 158 साल पुरानी तिजोरी को खोलने की कवायद शुरू की। दोपहर को शुरू हुई कवायद शाम तक सफल नहीं हो पाई, इतना ही नहीं इस तिजोरी को खोलने आए कारिगरों के भी पसीने छूट गए। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यह प्रक्रिया तिजोरी खुलने तक जारी रहेगी।

अंग्रेजों के जमाने की कर्ण नगरी के इतिहास को लाइब्रेरी में संजोया जाएगा। इसके चलते प्रशासनिक रिकाॅर्ड रूम को प्रशासन ने खंगालना शुरू कर दिया है। रिकाॅर्ड रूम में लंदन की एक बंद तिजोरी के अंदर का रिकाॅर्ड उत्सुकता का विषय भी बना हुआ है, क्योंकि इस तिजोरी का ताला फिलहाल चाबी लगाने वाले कारीगरों से भी नहीं खुल पाया है।

शनिवार को संडे मूड में डीसी डॉ. जे गणेशन ने पुरानी कोर्ट परिसर में बने रिकाॅर्ड रूम में दस्तक दी। रिकाॅर्ड रूम में रखे रिकार्ड का गहराई से अवलोकन किया गया। डीसी को यहां पर कई ऐसे दस्तावेज दिखाई दिए, जो नई पीढ़ी के लिए न केवल प्रेरणा स्रोत हो सकते हैं, बल्कि उन्हें अपने शहर की प्राचीन खासियतों और घटित घटनाओं केहैं। इस रिकाॅर्ड रूप में अंग्रेजी शासन के दौरान की कई रोचक जानकारी मिलने की भी उम्मीद की जा रही है। कंप्यूटर के युग में इस कागजी रिकाॅर्ड से जनउपयोगी जानकारियों को चिन्हित करने के लिए डॉ. गणेशन ने यह कदम उठाया है।

चाबी ढूंढ़ने का होगा प्रयास
अब तिजोरी काे काटने से पहले चाबी ढूंढ़ने का प्रयास किया जाएगा।
नई बिल्डिंग में शिफ्ट होना है यह रिकाॅर्ड
प्राचीन रिकाॅर्ड को सुरक्षित रखना जरूरी है। इसके लिए प्रशासन की ओर से लघु सचिवालय में बनाए गए नए रिकाॅर्ड रूम में दस्तावेजों को शिफ्ट किया जाना है। इसी के साथ-साथ रिकाॅर्ड से उन महत्वपूर्ण दस्तावेजों को ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है जो लाइब्रेरी में सुशोभित होकर नई पीढ़ी को अपने शहर के पुरातन इतिहास से भी रूबरू करा सके।