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डाउनलोड करेंगोहाना/चंडीगढ़. गेहूं पर बोनस व नष्ट हुई फसलों के मुआवजे की मांग को लेकर पिछले पांच दिनों से गांव रूखी में अनशन पर बैठे भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष सरदार गुरनाम सिंह चढूनी को पुलिस और प्रशासन ने जबरन उठा लिया। उनको एंबुलेंस में डालकर इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ ले जाया गया है। भाकियू नेता को जबरन ले जाने पर किसान नेताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। गुरनाम सिंह के अनशन से उठते ही चार अन्य किसान नेता अनशन पर बैठ गए। अनशन स्थल पर तनाव का माहौल बना हुआ है।
मंगलवार को डीसी पंकज अग्रवाल व एसपी अरुण सिंह भारी पुलिस बल के साथ अनशन स्थल पर पहुंचे। भाकियू अध्यक्ष को बताया कि चिकित्सकों के अनुसार उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है। इसलिए इलाज कराना जरूरी है। इस पर सरदार गुरनाम सिंह ने साफ कहा कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। पांच दिन में उनका ढाई किलोग्राम वजन कम हुआ है। इसके अलावा उन्हें किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। इस पर पुलिस ने एक न सुनी तथा भाकियू अध्यक्ष को उठाने की बात कही। इस पर किसान नेता गांव घिलौड़ निवासी सुंदर सिंह व सुरेंद्र मलिक ने कुछ देर का समय मांगा। बाद में गांव के लोगों से विचार विमर्श करने के बाद भाकियू अध्यक्ष को उठाने से मना कर दिया।
इस पर एसपी ने पुलिस कर्मचारियों को निर्देश दिया कि चढूनी को एंबुलेंस में डाला जाए। आदेश मिलते ही डीएसपी यशपाल खटाना व एएसआई सुभाष ने भाकियू अध्यक्ष को उठाकर एंबुलेंस में डाल लिया। उसके बाद पुलिस ने कुछ किसान नेताओं को भी जबरन एंबुलेंस में डालना शुरू कर दिया तो किसानों ने विरोध स्वरूप नारेबाजी शुरू कर दी। इस मौके पर एसडीएम विवेक चौधरी, डीएसपी यशपाल खटाना, डीएसपी मुख्यालय बलबीर सिंह व नायब तहसीलदार बलवान सिंह देशवाल मौजूद थे।
चंडीगढ़ भेजने पर आपत्ति जताई
भाकियू कार्यकर्ताओं ने सरदार गुरनाम सिंह को पीजीआई चंडीगढ़ जे लाए जाने पर आपत्ति जताई है। किसान नेताओं का कहना है कि चंडीगढ़ ले जाए जाने से साफ हो गया है कि सरकार की नीयत में खोट था। इसीलिए पहले उन्हें खानपुर कलां या रोहतक में ले जाकर इलाज कराने की बात कही गई थी। लेकिन बाद में अचानक उन्हें चंडीगढ़ ले जाया गया। यह अपने आप में संदेह पैदा करता है।
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