पानीपत. प्रदेश में रजिस्टर्ड पार्टियों में कोई नाम से गरीब है तो कोई उम्मीदवारों से। कुछ के पास संसाधनों का अभाव है। कुल 68 राजनीतिक दल हैं। इनमें छह राष्ट्रीय और दो राज्यस्तरीय पार्टियां हैं। इसके बावजूद चुनावी मैदान में 6 से 8 राजनीतिक दल ही नजर आ रहे हैं।
13वीं विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने के बाद दैनिक भास्कर ने जब चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड हरियाणा के राजनीतिक दलों के बारे में पड़ताल की तो पता चला कि कई पार्टियों के नाम कांग्रेस, बसपा, हजकां और अन्य दलों से मिलते-जुलते हैं। इनमें ज्यादातर राजनीतिक दलों के नाम तो ऐसे हैं, जो शायद वोटरों ने कभी सुने भी न हों। यानी राज्य में दलों की तो भरमार है, लेकिन इनका वजूद न के बराबर है।
नि:स्वार्थ सेवा जैसे नाम भी
पानीपत में राष्ट्रीय गरीब दल है तो भिवानी में रिपब्लिक बैकवर्ड पार्टी, जींद में हरियाणा गरीब पिछड़ा युवा संगठन पार्टी और महेंद्रगढ़ में नि:स्वार्थ सेवा पार्टी है। किसानों के नाम पर भी अलग से राजनीतिक दल बने हैं। इनमें जय जवान, जय किसान पार्टी, राष्ट्रीय किसान पार्टी हैं। आरक्षण जैसे मुद्दों पर काम करने वाले एक्टिविस्टों ने भी आरक्षण विरोधी पार्टी जैसी पार्टियां बनाई हैं।
महान दल और टोला पार्टी भी
राजनीतिक दलों की इस भीड़ में महान दल फरीदाबाद और टोला पार्टी पलवल से रजिस्टर्ड हैं। इनके साथ ही मातृ भक्त पार्टी
सोनीपत और भारतीय संत मत पार्टी रेवाड़ी में रजिस्टर्ड हैं। कुछ राजनीतिक दलों का नाम रखने में राष्ट्रीयता की भावना भी झलकती है।
दो जिलों में एक भी दल रजिस्टर्ड नहीं
जींद,हिसार, रेवाड़ी, कैथल, यमुना नगर, पलवल, मेवात, पंचकूला, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, महेंद्रगढ़ आदि जिलों में कहीं 1 और कहीं 2 राजनीतिक दल रजिस्टर्ड हैं। जबकि सिरसा और फतेहाबाद में एक भी राजनीतिक दल रजिस्टर्ड नहीं है