अपने मौलिक अधिकारों का लाभ उठाएं महिलाएं : पूजा गोगलिया
दैनिकभास्कर द्वारा अपने सामाजिक दायित्व के तहत एसडी कॉलेज में ‘महिलाओं के संवैधानिक अधिकार’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें एडवोकेट पूजा गोगलिया मुख्य वक्ता रहीं। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। प्राध्यापिका संतोष तृप्ता ने मंच संचालन किया।
गोगलिया ने सेमिनार में उपस्थित महिलाओं और कॉलेज की छात्राओं से संवाद करते हुए उन्हें संविधान में महिलाओं के लिए निहित अधिकारों और उनका प्रयोग करने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान सबसे लंबा है और इसे पूरा करने में 2 साल, 11 महीने 18 दिन का समय लगा। संविधान का मसौदा डॉ. भीमराव अंबेडकर की अगुवाई में तैयार किया गया था।
संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत भारतीय संविधान में महिलाओं को समानता का अधिकार दिया गया है जिसके तहत नारी और पुरुष में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा सकता।
उन्होंने बताया कि धारा 39ए के तहत महिला को स्वतंत्र रूप से जीवन यापन करने का अधिकार है यानी जीने के अधिकार का किसी भी तरह से हनन हो। यदि ऐसा होता है तो महिला सीधा हाई कोर्ट में अपील कर सकती हैं। किसी मौलिक अधिकार का हनन होने पर अनुच्छेद 226 के तहत सीधा हाई कोर्ट में जा सकते हैं।
जागरूकता की जरूरत
महाविद्यालयके प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि महिला अधिकारों पर जितनी ज्यादा चर्चा की जाए, वह कम है, क्योंकि समाज के लोगों को अधिकारों की जानकारी बहुत कम है। इसके लिए लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक हाेने की आवश्यकता है। दैनिक भास्कर द्वारा महिलाओं के लिए इस मुद्दे पर कार्यक्रम की योजना सराहनीय है। महिलाओं और छात्राओं ने गोगलिया से कानून संबंधी अपनी शंकाओं के समाधान भी लिए।
हक के साथ कर्तव्यों का निर्वहन भी जरूरी
गोगलियाने छात्राओं से बातचीत में हक पाने के साथ-साथ मौलिक कर्तव्यों का निर्वहन करने की भी सीख दी। उन्होंने कहा कि समाज में बहुत से लोग ऐसे हैं जो जानकारी के अभाव में कानूनी सहायता नहीं ले सकते। ऐसे लोगों की सहायता कर अपने कर्तव्यों को पूरा करें। कमजोर वर्ग के साथ रहें और उनका मार्गदर्शन करें।
पानीपत. दैनिकभास्कर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित छात्राएं महिलाएं