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आग बुझाने में जिंदा जला मजदूर, आनंद इंटरनेशनल के मालिक सुरेश गर्ग पर गैर-इरादतन हत्या का केस

5 वर्ष पहले
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रिसालूरोड स्थित मिंक प्लांट आनंद इंटरनेशनल में मजदूर की जिंदा जलने पर उसके मालिक सुरेश गर्ग पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है। मैनेजर सहित जिम्मेदार को भी इसमें आरोपी बनाया गया है। मृतक रामप्रकाश की प|ी मीना का आरोप है कि आग लगने के बाद बजाय भागने के मालिक ने उसके पति को बुझाने के लिए अंदर भेज दिया। चांदनी बाग थाना प्रभारी अनिरुद्ध चौहान ने बताया कि मृतक की प|ी की शिकायत पर फैक्ट्री मालिक सुरेश गर्ग, मैनेजर भंडारी अन्य जिम्मेदार प्रबंधकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 329 304 (गैर इरादतन हत्या) का मामला दर्ज किया है। शुक्रवार की सुबह 9 बजते-बजते धूप होने के बाद भी सेक्टर 25 और 29 क्षेत्र में अंधेरा छा गया। काले धुएं की गुबार से पूरा आसमान काला हो गया। दमकल की गाड़ी रिसालू रोड पर दौड़ी तो पता चला कि आनंद इंटरनेशनल में भयानक आग लगी है। हवा पश्चिम की ओर थी, इसलिए पूरी फिनिशिंग यूनिट में फैल गई। जहां से ऑफिस ब्लॉक में भी आग फैल गई। तीन घंटे में ही 94 हजार वर्ग फीट में फैली फिनिशिंग यूनिट जलकर राख हो गई। जेसीबी की मदद से शेड की दीवार तोड़ी गई।

आग लगने के समय अंदर मौजूद मजदूरों रामेंद्र, अरुण, आजाद, रोहित, राजीव, प्यारेलाल और अमित ने बताया कि सुबह 8 बजे रात की शिफ्ट खत्म होती है और दिन की शिफ्ट के मजदूर आते हैं। आने के बाद काम ही शुरू किया था कि 8 बजकर 40 मिनट पर पैकिंग एरिया में हम 60 मजदूर काम कर रहे थे। तभी मशीन के पास आग सुलगती दिखी, जब तक खुद को संभाला तब तक तो एक मिनट के अंदर पूरी जगह में आग फैल गई। मिंक और कंबल होने के कारण चारों ओर आग ही आग थी। सामने मौत खड़ी दिख रही थी। सभी ने मिलकर हौसला किया और फायर सिलेंडर ढूंढने का प्रयास किया लेकिन आग और धुएं के अंधेरे के कारण नहीं ढूंढ पाए और भाग लिए। फैक्ट्री का एक ही गेट है जो कुछ दूरी पर है, जब तक गेट तक पहुंचे तो भगदड़ मच चुकी थी। इतने में एक मजदूर गेट पर नीचे गिर गया, लेकिन सभी को बाहर निकलने की इतनी जल्दी थी कि उसके ऊपर से ही निकल लिए। बाद में उसे उठाकर साथ ले गए। बाहर निकलने के बाद होश संभाला तो पता चला कि एक मजदूर अंदर ही रह गया। अंदर अंधेरे के कारण उसे कुछ दिखा नहीं होगा और वो बिलकुल मशीन के पास था, इसलिए उसका निकल पाना मुश्किल था। अब भी वो आग का दृश्य आंखों के सामने से नहीं जा रहा, लगता है कि मौत के आगे से भाग कर आए हैं।

वर्ष 1988 में इसकी स्थापना की गई। आज इसके जिले में 13 प्लांट हैं। रिसालू रोड का प्लांट वर्ष 2002 में लगाया गया था। मालिक सुरेश गर्ग ने बताया कि यहां रोजाना 40 लाख रुपए के मिंक कंबल का उत्पाद होता है। ताइवान और चीन की करीब 70 मशीनें जल गईं। उन्होंने बताया कि आग से काफी नुकसान हुआ है।

मजदूर के मरने की सूचना मिलते ही मजदूर एसोसिएशन के सदस्य फैक्ट्री में पंहुचे। एसोसिएशन सदस्यों ने मांग की है कि मृतक के परिवार वालों की हालत देखते हुए इन्हें दस लाख रुपए का मुआवजा मिलना चाहिए। अगर हाजिरी रजिस्टर में नाम नहीं मिलता या कोई अन्य लापरवाही सामने आती है तो फैक्ट्री मालिक पर मामला दर्ज कर कार्रवाई होनी चाहिए। आनंद इंटरनेशनल में लगी भीषण आग में श्रमिक की मौत पर सीटू ने गहरा दुख व्यक्त किया। सीटू ने जिला प्रशासन से मांग की कि मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी जाए। सीटू प्रतिनिधिमंडल जिसमें आनंद जवाहरा, सुनील दत्त, जयभगवान शामिल थे, ने आनंद इंटरनेशनल का दौरा भी किया। उन्होंने घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

पानीपत . रामप्रकाश की फोटो दिखाकर परिजन से पहचान करवाते डीएसपी जोगेंद्र राठी।

राम प्रकाश

रामप्रकाश के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। मृतक के जीजा ने बताया कि वह कई वर्षों से यहां काम कर रहा था। दो साल पहले उसने आनंद इंटरनेशनल फैक्ट्री में काम करना शुरू किया था। दो वर्ष पहले ही वह गांव से अपने परिवार को ले आया था। यहां पर वह कृष्णा गार्डन के पास किराए के मकान में माता-पिता, तीन बेटी, एक बेटा और प|ी के साथ रह रहा था। वह शुक्रवार को आठ बजे फैक्ट्री में काम करने के लिए गया था।

फैक्ट्री में कोई और मजदूर दबा हो और आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए मधुबन से डॉग स्क्वायड पहुंची। चांदनी बाग थाना प्रभारी अनिरुद्ध ने पुलिस की चार टीम बनाई और डॉग स्क्वायड के साथ पूरी फैक्ट्री की जांच की। जांच के बाद थाना प्रभारी ने फैक्ट्री मालिक को निर्देश दिए कि आग लगने के समय फैक्ट्री में मौजूद मजदूरों को थाने भेजें और सभी मजदूरों की हाजिरी की जानकारी भी दें।

पानीपत . सेक्टर29 स्थित आनंद इंटरनेशनल फैक्ट्री में आग लगने के बाद जले शेड को देखते पुलिसकर्मी। इधर, आग बुझाने पहुंची बंद फायर ब्रिगेड को धक्का लगाकर स्टार्ट करवाते लोग।

चांदनी बाग थाना के पास फैक्ट्री में लगी भीषण आग में मृतक रामप्रकाश काफी देर तक झुलसता रहा। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसकी हाथ-पैर की सभी अंगुली पूरी तरह जल गईं। साथ ही होंठ पूरी शरीर की चमड़ी भी आग में नष्ट हो गई। आग में पूरा शरीर भुनने के बाद मृतक के पिता मनोहर और प|ी मीना को सिविल अस्पताल के मुर्दाघर में पहचान के लिए पुलिस लाई तो उन्होंने पहले रामप्रकाश का शव होने से मना कर दिया। बाद में मृतक के जीजा कृष्ण कुमार ने चेहरे पर बने निशान से उसकी पहचान की।

मृतक मजदूर को पुलिस ने फैक्ट्री से निकाला तो वह पूरी तरह जला हुआ था। पुलिस ने उसे सिविल अस्पताल भिजवाया लेकिन तब तक वह मर चुका था। मृतक की पहचान रामप्रकाश निवासी उत्तर प्रदेश के रूप में हुई। इसकी प|ी मीना और बहन का सिविल अस्पताल में रो-रो कर बुरा हाल था। प|ी मीना ने बताया कि रामप्रकाश का आज सुबह फैक्ट्री जाने का मन नहीं था। वह कह रहा था की आज नहीं जाता लेकिन घर खर्च के लिए मजदूरी करना जरूरी है। छुट्टी नहीं ले सकता लेकिन कोशिश करूंगा की जल्दी आऊं। मुझे नहीं पता था की जाएंगे तो आएंगे ही नहीं, काश गए ही नहीं होते। अब तीन लड़कियां और एक लड़का है, अब इन्हें किसके सहारे पालूंगी।

{आरोप: आग से बचने के बजाय मालिक ने बुझाने को अंदर भेजा

{मृतक की प|ी मीना की शिकायत पर पुलिस ने दर्ज किया केस

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