बेटियों को पढ़ाएं और संस्कारवान भी बनाएं
^शहरमें आए कुछ ही दिन हुए थे। मंदिर में पूजा कार्यों की जिम्मेदारी मिली। रोजाना कई बेटियों को मंदिर की सीढ़ियों पर प्रसाद आदि मांगते देखा। पता करने पर बात सामने आई कि आसपास के क्षेत्र में मजदूर परिवारों की बेटियां मांगने आती हैं। मंदिर के सामने ही खाली पड़े मकान में इन बेटियों के लिए स्कूल खुलवाया। फ्री में बेटियों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों को आमंत्रित किया।\\\' -रामप्रकाशपाठक, पुजारी
पानीपत | बेटी,बहन प|ी आज किसी किसी रूप में कार्य करके परिवार का गौरव बन रही हैं। उनकी कामयाबी के पीछे सबसे बड़ा कारण उनका परिवार या आसपास के कोई कोई जरूर बने हैं। ऐसे ही लोगों का अनुभव कहता है कि बेटियों को पढ़ाई आगे बढ़ने की छूट देने के साथ उन्हें संस्कारी बनाना सबसे पहला काम होना चाहिए।
^बेटियों के जन्म पर उनके परिवार को सम्मानित किया जाना चाहिए। इसके लिए शहर की सामाजिक संस्थाएं आगे आएं। कई बार जो बेटियां लावारिस हालत में मिलती हैं, उन्हें सहारा देने वाले और हाथ थामने वाले लोग खड़े होने चाहिए। जो बेटियां किसी किसी रूप में परिवार का गौरव बनती हैं, उन्हें भी सम्मानित किया जाए। यह तभी संभव होगा, जब आप जब जागरूक होंगे।\\\' -अशोककुमार छाबड़ा, जिला संयोजक, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ
^शिक्षकों को अपना नजरिया बदलकर पाठ्यक्रम को खत्म करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। विशेष रूप से बेटियों को सामाजिक जागरूकता का ज्ञान जरूरी है। मेरी बेटी एमटेक कर गुड़गांव के एक स्कूल में लेक्चरर बनी है। हम 3 देवियों की कल्पना कर उनकी पूजा तो करते हैं, लेकिन देवियों के अवतार बेटियों को खत्म कर रहे हैं। आने वाली पीढ़ी को शिक्षा के साथ संस्कार, चरित्र निर्माण राष्ट्र सेवा भाव का ज्ञान जरूरी है। मजबूरी में पड़ी 2 बेटियों की फीस में मदद की तो वे आज लेक्चरर तक बन गई। यह भावना सभी शिक्षकों में जरूरी है।\\\' -बीबीशर्मा, प्रोफेसर
^प|ी को सिर्फ एक गृहिणी ही ना मानें। उसे जीवन का सच्चा दोस्त सहयोगी मान उसे सपोर्ट करें। प|ी आरती कथूरिया को सच्चा दोस्त मान पढ़ाई में सहयोग किया तो वह एसजेएस इंटरनेशनल स्कूल में कॉमर्स शिक्षक बन गई। बेटे भुवनेश की भी जिम्मेदारी संभाली। कोई भी आदमी अपनी बहन बेटी के लिए एक ही उम्मीद करता है कि शादी के बाद पूरा मान सम्मान मिले। हमारे घर आने वाली बहू की किसी घर की बेटी है। इस बात को नहीं भूलना। प|ी को भी सहयोग करेंगे तो वह अपने घर का गौरव बनेगी।\\\' -दीपककथूरिया, संयोजक, भगत सिंह से दोस्ती मंच
^बेटी की पढ़ाई ही उसे दिया जाने वाला असली दहेज होगा। यह मानकर बेटी शुलभा राय की पढ़ाई के लिए पानीपत अर्बन को-आॅपरेटिव बैंक से शिक्षा ऋण लेते समय जमा पूंजी को गारंटी के रूप में रख दिया। छोटी बहन की पढ़ाई में भी पूरा योगदान दिया। बेटी ने इंग्लैंड से इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ में मास्टर डिग्री, वाशिंगटन यूनिवर्सिटी अमेरिका में पढ़ाई करने के बाद वाशिंगटन बार में अटॉर्नी डिग्री लेने वाली 2014 में एकमात्र भारतीय बनी। वर्तमान में सीएटल में अपना वैवाहिक जीवन जीते हुए कार्यरत। छोटी बहन एक अंतरराष्ट्रीय बैंक में मैनेजर है।\\\' -राममोहन राय, एडवोकेट एवं हाली पानीपती ट्रस्ट के महासचिव
^ महिलाएं ही महिलाओं की दुश्मन हैं। पड़ोस में बेटी होती है तो पड़ोसन बधाई देने की बजाय अफसोस जताते जाती है। यह गलत हैं। बेटियों को आजादी देने के साथ विवेकशील बनाना होगा। बेटियों को आत्मरक्षा के लिए प्रेरित करना होगा। मार्शल आर्ट समेत विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए बेटियों को मजबूत बनाना होगा।\\\' -नितिनमनोहर नागपाल, समाज सेवी
^ संस्था तो टूटते परिवारों को आमंत्रित करने के लिए बनाई। तलाक लेने की नौबत तक आज तक जितने भी दंपति आए, इनमें सबसे पहले उसमें महिलाओं को ही बेटियों की तरह समझाया। उन्हें जीवन के उदाहरण दिए। ज्यादातर में बात सामने आई कि तलाक केे पीछे ज्यादातर केस में महिलाओं के मायके से मिलने वाला सहयोग पता चला। बेटियों को दूसरे घर की बहू समझकर ही पालन पोषण करें, ताकि किसी परिवार को तकलीफ पहुंचे।\\\' -कृष्णकांता,निदेशिका, माता सीता रानी सेवा संस्था
^ आज भी वो दिन याद हैं, जब एक परिवार 9वीं कक्षा के बाद बेटी की पढ़ाई छुड़वा रहा था। कारण पूछा तो आर्थिक तंगी बताई। तभी से उस बेटी की पढ़ाई की फीस की जिम्मेदारी ली तो वह आज जेबीटी तक पास कर गई। इसी तरह कई अन्य लड़कियों की पढ़ाई में भी योगदान दिया। इसकी खुशी तो मिली ही साथ ही ये लड़कियां भी खूब पढ़ गई। बेटियों से संबंधित जहां भी कार्यक्रम का पता चलता हैं, बिना बुलाए ही पहुंच जात हूं।\\\' -प्रदीपमलिक, शिक्षक, इसराना
^ इंसान की एक ही सोच होनी चाहिए, आपकी बेटी मेरी बेटी है। किसी भी बेटी को दूसरे घर की बेटी समझे। जो पढ़े लिखे लोग हैं, वे कम पढ़े लोगों को सरकार की योजनाओं के बारे में अवगत कराएं। जो लड़कियां शिक्षित हो जाती हैं, वे अपने पड़ोस में कम पढ़ी लिखी लड़कियों को सहयोग करें।\\\' -मनोजशर्मा, सह संयोजक, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ
^सास अपनी बहू को बेटी की तरह समझे। इसके बाद कोई माता-पिता बेटी के जन्म पर परेशान नहीं होगा। बेटियों को बचाने पढ़ाने का मुद्दा कोई राजनैतिक नहीं है। समाज सेवियों को बेटियों के सहयोग के लिए आगे आना होगा। इसमें अन्य लोगों को भी सहयोग करना चाहिए। ऐसा करने से समाज और तरक्की करेगा। बेशक से नाम के लिए नहीं, शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाली गरीब परिवारों की बेटियों को गोद लेकर पढ़ाएं तो बहुत बदलाव होगा।\\\' -ललितगोयल, जिला संयोजक, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
^लावारिस हालत में जहां भी बेटियां मिलती हैं, उन्हें अनाथ आश्रम जाने दें। ऐसी बेटियों के लिए शहर में छात्रावास बनाया जाए। इसके साथ ही शहर में बाहर से आए प्रवासी मजदूरों को बेटियों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाए। ऐसा करने पर बेटियां बढ़ेगी भी और गौरव भी बनेंगी। हमंे अपने आसपास ऐसा माहौल बनना होगा ताकि बेटियों को आगे बढ़ाने के प्रति लोगोें में जागरूकता की भावना बढ़े। पड़ोस में कई ऐसी लड़कियां हैं जो पढ़ाई छोड़ चुकी थी। उन्हें प्रेरित किया तो वे आज अच्छी पोजिशन पर पहुंच गई।\\\' -गीतागाबा, सदस्य, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ