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तनाव में हो तो सुनें सत्संग : ज्ञानानंद

5 वर्ष पहले
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तनावमें हो तो सत्संग सुनने आएं। सत्संग में आने से ईश्वर का रस आने लगेगा, ध्यान का गुरु कृपा का प्रसाद उभरने लगेगा। इससे दुनिया की परेशानियों से दूर एक अच्छे वातावरण में आने का मौका मिलेगा। सत्संग एक अद्वितीय र| है, कोहिनूर है, पारसमणि है। इसीलिए गुरु दरबार में आकर सत्संग का श्रवण नित्य करना चाहिए। इससे आपका जीवन ही श्रेष्ठ बनेगा।

श्री प्रेम मंदिर में सत गुरुदेव कांता देवी महाराज अध्यक्षता में श्री प्रेम मंदिर धाम के 60वें वार्षिकोत्सव एवं प्रेम सम्मेलन के शुभारंभ समारोह में भानपुरा से पधारे से पहुंचे स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने अपने सत्संग की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि ज्यों-ज्यों सत्संग सुनते जाएंगे, त्यों-त्यों अाप जीवत्व के स्वभाव से ऊपर उठते जाएंगे। ठीक ही कहा गया है कि सत्संग से वंचित होना महान पापों का फल है। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री गणपति पूजन एवं जोत प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद श्री सुंदरकांड पाठ हुआ।

इस अवसर पर मनोहर लाल मिगलानी, जगदीश लाल ढींगड़ा, रमेश अखीजा, चंद्रभान वर्मा, परमवीर ढींगड़ा, देसराज नारंग, अशोक जुनेजा, अरूण मिगलानी, राजू सेठी, सन्नी बरेजा, कौशल, यशपाल अरोड़ा, बलदेव राज, हिमांशु अखीजा, सुरेश अरोड़ा, ओम ढींगड़ा, पंकज गाबा, सुरेश रेवड़ी, पं. दिनेश शर्मा, डा. प्रताप सिंह, धनंजय खेड़ा चिमन लाल नागपाल मौजूद रहे।

पानीपत. प्रेममंदिर में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु।

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