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सैफ खेलों में खंडरा के नीरज चोपड़ा ने जीता गोल्ड

5 वर्ष पहले
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मजबूतइरादे और दृढ़ इच्छाशक्ति इंसान को कहां से कहां पहुंचा सकती है। यह कर दिखाया है पानीपत जिले के गांव खंडरा के किसान सतीश कुमार के बेटे नीरज चोपड़ा ने। एक समय था जब नीरज किन्हीं कारणों से अपनी नियमित पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाया और उसे पत्राचार का सहारा लेना पड़ा। आज जेवलिन थ्रो के इस युवा खिलाड़ी ने महज 4 साल के अभ्यास में नीरज आज ओलंपिक की पायदान तक जा पहुंचा है। हाल ही में गुवाहटी में चल रहे साउथ एशियन खेलों में नीरज ने जेवलिन थ्रो में गोल्ड मेडल जीता है। इतना ही नहीं नीरज ने 82.23 मीटर तक थ्रो कर खेल का नया रिकाॅर्ड भी बनाया है। सैफ खेलों के दम पर ही ओलंपिक में भी चयन होना है। नीरज का संयुक्त परिवार है। इसमें उनके पिता सतीश कुमार चोपड़ा सबसे बड़े हैं, तो 3 छोटे चाचा सुल्तान, भीम सिंह सुरेंद्र हैं। इस संयुक्त परिवार का नीरज सबसे बड़ा बेटा है। परिवार में नीरज समेत 3 भाई और 5 बहनें हैं। नीरज की मां सरोज देवी एक गृहिणी हैं।

नीरज ने हाल ही में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में रिकाॅर्ड 81.04 मीटर कायम करते हुए सोना जीता है। इसके अलावा नेशनल रिकाॅर्ड अंडर-16 में उसके नाम है। इसमें वह 68.48 मीटर पर लक्ष्य साध चुका है। सीनियर इंटर स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड और 77.67 मीटर, जूनियर नेशनल मीट में रिकार्ड 76.81 मीटर, जूनियर फेडरेशन कप में गोल्ड मेडल, नेशनल ओपन में गोल्ड मेडल और 77.67 मीटर यूथ एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत के अलावा अब सैफ खेलों में भी 82.23 मीटर के थ्रो से कीर्तिमान बनाया है।

गांव बिंझौल का जयवीर उसका जिगरी दोस्त है। जयवीर भी जेवलिन थ्रो का खिलाड़ी है। वह कुश्ती का शौकीन था, तो रोजाना स्टेडियम में भी आना लगा रहता था। यहीं पर जयवीर ने उसे सुझाया कि क्यों वह भी जेवलिन थ्रो में अपना भाग्य आजमाए। 2011 में पहली बार हाथ में जेवलिन (भाला) उठाया। लगभग 12 किलोग्राम वजन कम करने के बाद नीरज मैदान में ऐसा चमत्कार करने लगा कि पुराने धुरंधर भी उसका कौशल देख कर दंग रह गए। फिलहाल, नीरज डीएवी कालेज चंडीगढ़ में बीए कर रहा है।

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