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मनजीत ने जीता जिला कुमार और केसरी का खिताब

5 वर्ष पहले
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शिवाजीस्टेडियम में मंगलवार को जिला कुश्ती अखाड़ा प्रतियोगिता का समापन हुआ। जिसमें महावटी निवासी मनजीत ने जिला कुमार और जिला केसरी का खिताब जीता। प्रतियोगिता में पहले दिन सोमवार को जूनियर पहलवानों की कुश्ती हुई थी। मंगलवार को सीनियर खिलाड़ियों ने अपना दम दिखाया। प्रतियोगिता के समापन समारोह में रोटरी क्लब सदस्य सुदर्शन चुघ और उद्योगपति रंजीत भाटिया ने विजेता पहलवानों को सम्मानित किया।

कार्यवाहक जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी राजेंद्र पाल सिंह ने बताया कि इस प्रतियोगिता में ग्राम स्तर पर चलाए जा रहे कुश्ती प्रशिक्षण केंद्रों से 320 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। इसमें अलग-अलग आयु वर्गों में जिला कुमार के लिए 62 किलो वजन और जिला केसरी के लिए 74 किलो वजन में जिला कुमार और केसरी ख़िताब की प्रतियोगिता हुई। जिला कुमार के लिए राजेश कवि और जिला केसरी के लिए अमित इसराना दूसरे स्थान पर रहे। यहां पर विजेता खिलाड़ियों को राज्य स्तरीय कुश्ती अखाड़ा प्रतियोगिता में कुमार और केसरी टाइटल के लिए भाग लेंगे। इस अवसर पर कुश्ती कोच अनुज जागलान, मनदीप, बिजेंद्र सिंह, महिपाल, रितू, कुनाल, सुनील कुमार, दलबीर सिंह, रामफल दहिया और जगबीर सिंह आदि मौजूद रहे।

ये रहे कुश्ती स्पर्धा के परिणाम

{18 वर्ष आयु वर्ग के 42 किलोग्राम भार वर्ग में शुभम पलड़ी, 46 किलो में अतुल इसराना, 50 किलो में बिजेंद्र इसराना, 54 किलो में जयदीप बुआना लाखू, 58 किलो में परवीन इसराना, 63 किलो में पुरुषोत्तम चुलकाना, 69 किलो में मोहित चुलकाना और 76 किलो में सन्नी देहरा विजेता बने।

{वरिष्ठ आयु वर्ग के 50 किलो में सुनील इसराना, 54 किलो में राकेश इसराना, 58 किलो में विश्वास इसराना, 63 किलो में बलराम इसराना, 69 किलो में राहुल पट्टीकल्याणा, 76 किलो में राजेश कवि 85 किलो में हरपाल अहर जीते।

पिता से प्रेरणा लेकर जीता खिताब

जिलाकुमार और केसरी का खिताब जितने वाले महावटी निवासी मनजीत ने बताया कि उसके पिता भी पहलवान रहे हैं। उन्हीं को खेलते देख कुश्ती में रूचि हुई। पिता राममेहर का भी सपना था कि उनका बेटा पहलवान बने। इसलिए सभी पारिवारिक स्थितियों को नजरअंदाज करते हुए उसे दिल्ली के गुरु हनुमान अखाड़ा में कुश्ती के गुर सीखने के लिए भेजा। बेटे को पहलवान बनाने के लिए पिता ने कोई कसर नहीं छोड़ी और खेती घर के काम छोड़कर बेटे को अखाड़े में दूध घी देने जाते थे। जिससे मनजीत को बाहर का खाना खाना पड़े। मनजीत का कहना है कि उसके पिता उसे अच्छा पहलवान बनाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। उन्हीं से प्रेरणा लेकर यह ख़िताब जीता है और इससे पहले आल इंडिया यूनिवर्सिटी में भी गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। मंजीत का सपना अंतरराष्ट्रीय मुकाबले जीतना है।

पानीपत. शिवाजीस्टेडियम में जिला कुमार और जिला केसरी प्रतियोगिता में दमखम दिखाते पहलवान।

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