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जीवन में सत्य नहीं है तो वह नहीं हो सकता सच्चा साधु : सुभद्र मुनि

5 वर्ष पहले
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जीवनमें सत्य नहीं है तो वह सच्चा साधु नहीं हो सकता। साधु का दूसरा लक्षण ही सत्य बोलना होता है। सत्य को बहुत अधिक समझने की आवश्यकता है। सत्य ही भगवान है। सत्य के अभाव में साधु की सभी क्रियाएं, जप तप सभी निष्फल हो जाते हैं। संसार के सभी धर्म ग्रंथों में सत्य को सर्वोपरी माना गया है।

गांधी मंडी स्थित जैन स्थानक में एसएस जैन सभा की ओर से सोमवार को हुई धर्म सभा में सुभद्र मुनि महाराज ने सत्य का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि सत्य का संबंध केवल वाणी तक ही सीमित नहीं होता। साधु की प्रत्येक क्रिया सत्य से जुड़ी रहती है। सत्य ही भगवान होता है। सत्य की उपेक्षा करने वाला परमात्मा की उपेक्षा करता है। आज लोगों ने सत्य का साथ छोड़ दिया है। सर्वत्र झूठ का साम्राज्य है। जैसे मजबूत मकान मजबूत नींव पर ही टिकता है, उसी प्रकार धर्म भी सत्य रूपी मजबूत नींव पर खड़ा होता है। महाराज ने कहा कि जीवन में जो कुछ भी उपस्थित होता है वह सब हमारा ही किया धरा है। जो हमारा किया हुआ नहीं, वह हमारे सामने नहीं सकता। अनहोनी नाम की कोई चीज नहीं है। हमें वह घटना अनहोनी लगती है, जिसके लिए हम पहले से तैयार नहीं हैं। जीवन में अचानक से जाने वाली स्थिति हमें अनहोनी महसूस होती है।

परिस्थिति का सामना करने वाले रहते हैं सुखी

मुनिने कहा कि हर परिस्थिति का सामना करने के लिए पहले ही तैयार होते हैं तो हमें ज्यादा दुख नहीं होता है। हमारी पूर्व की तैयारी परिस्थिति का जज्बा भर देती है। इससे हम उस परिस्थिति का हिम्मत से मुकाबला कर लेते हैं। बुधवार को स्थानक में सामूहिक जैन भागवती दीक्षा महोत्सव होगा। इसमें जींद के बड़ौदा गांव से राजरानी चहल, उनकी बेटी एकता चहल के अलावा पूनम जैन कोमल जैन दीक्षा लेकर वैरागन मार्ग अपनाएंगी। ध्यान योगी डाॅ. शिवमुनि, उत्तर भारतीय प्रवर्तक सुमन मुनि के आशीर्वाद और आचार्य प्रवर सुभद्र मुनि के पावन सानिध्य में दीक्षा होगी। मंगलवार को मंगल मेहंदी आलेखन होगा।

कल होगा सामूहिक जैन भागवती दीक्षा महोत्सव

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