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40 दिन ब्रह्मचर्य, भक्ति में डूबे हनुमान स्वरूप

5 वर्ष पहले
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अबना कमाने की चिंता है और ना घर-गृहस्थी की। ध्यान हनुमान जी की भक्ति में है और चोला भी वैसा ही है। कहीं लंगोट तो कहीं भगवां या फिर सफेद वस्त्र धारण कर ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करते हुए शहर में 1200 के करीब हनुमान स्वरूप बने हैं। ये सब श्रद्धालु 40 दिन तक मंदिरों में ही रहेंगे। हनुमान जी के आदर्शों का प्रचार-प्रसार कर समाज में फैली कुरीतियों को दूर करना इनका उद्देश्य है।

करीब 85 साल पहले शुरू हुई हनुमान स्वरूप धारण करने की परंपरा को आज भी बखूबी निभाया जा रहा है। वर्तमान में पाकिस्तान के लैय्या जिले से पानीपत में आए लैय्या समाज के लोगों द्वारा इसे विशेष महत्व दिया जाता है। बच्चों से लेकर बड़ों तक विभिन्न आयु वर्ग के श्रद्धालु हनुमान स्वरूप धारण करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मंदिरों में बैठे हैं। हनुमान स्वरूप धारण ब्रह्मचर्य के कठोर नियमों का पालन ये करते हैं। हनुमान स्वरूप दशहरा से 40 दिन पहले धारण किया जाता है।

24घंटे में एक बार खाएंगे अन्न : हनुमानस्वरूप धारण करने वाले श्रद्धालु 24 घंटे में एक बार अन्न ग्रहण कर रहे हैं। नंगे पैर रहते हैं और जमीन या फिर लकड़ी के तख्त पर सोते हैं। हनुमान की लाल लंगोटी कसना अन्य नियमों का विशेष पालन किया जा रहा है। 40 दिन तक मंदिर ही ठिकाना रहेगा। अष्टमी से लेकर दशहरे के अगले दिन भरत मिलाप पर नगर परिक्रमा का दौर चलता है।

आजादी के पहले से चल रही परंपरा

^हनुमानस्वरूप धारण कर 40 दिन तक ब्रह्मचर्य का पालन करने की परंपरा आजादी से पहले से चल रही है। आजादी के कई साल बाद तक पानीपत में भक्त मूलचंद और दुलीचंद हनुमान स्वरूप धारण करते थे। धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती चली गई। पानीपत के विभिन्न मंदिरों में इस साल हनुमान स्वरूप धारण करने वालों की संख्या 800 को पार कर गई है। परिवार और समाज में सुख-समृद्धि शांति के लिए ऐसा किया जाता है। -हिमांशु चुघ, हनुमान स्वरूप धारी

प|ी की भी नहीं देखते सूरत

^जिसतरह श्रद्धालु भगवान से मन्नत मांगते हुए प्रसाद बांटते हैं, कांवड़ लाते हैं। इसी तरह हमारे यहां घर में मन्नत मांगते हैं और मन्नत पूरी होने पर परिवार का एक सदस्य 40 दिन तक हनुमान स्वरूप धारण करता है। कोई शादीशुदा है तो वह अपनी प|ी तक को 40 दिन तक देख तक नहीं सकता। -सन्नी, हनुमान स्वरूप धारी

पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ती गई श्रद्धा

^40दिन हनुमान स्वरूप धारण कर ब्रह्मचर्य का पालन करने की परंपरा पानीपत, सोनीपत और सूरत में ज्यादा है। अन्य जगह के लोगों को तो इसकी पूरी जानकारी भी नहीं है। उनके रिश्तेदार इत्यादि विशेष तौर पर इन दिनों में उनके यहां पहुंचकर ब्रह्मचर्य रूप देखते हैं। -साहिल, हनुमान स्वरूप धारी

हनुमान जी के आदर्शों का प्रचार-प्रसार कर कुरीतियों को दूर करना उद्देश्य

पानीपत. भीमगौड़ा मंदिर में हनुमान जी की पूजा करते हनुमान स्वरूप।

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