सीएम ने पूछा कितने मंडल अध्यक्ष पहले आ चुके हैं सीएम हाउस, नहीं उठे हाथ

5 वर्ष पहले
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पानीपत. प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद करीब सवा दो साल के कार्यकाल में पहली बार सीएम और प्रदेश अध्यक्ष ने प्रदेश के सभी मंडल अध्यक्षों के साथ सोमवार को सीएम हाउस में बैठक की। इतने ज्यादा समय में एक भी बैठक न होने और सुनवाई न होने की नाराजगी मंडल अध्यक्षों ने बैठक के दौरान खुलकर जाहिर भी की। 

सीएम ने पूछा कि अब तक कितने मंडल अध्यक्ष सीएम हाउस पर आ चुके हैं तो किसी मंडल अध्यक्ष का हाथ खड़ा नहीं हुआ। जिसे देख सीएम हैरान रह गए और कहा कि मंडल अध्यक्ष पार्टी और सरकार दोनों की मजबूर कड़ी हैं, इसलिए साल में इनके साथ एक बैठक जरूर रखी जाए। 15 और 16 जनवरी को पानीपत में हुई भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में सुझाव रखा गया था कि मंडल अध्यक्षों के साथ सीएम की अलग से बैठक होनी चाहिए।

प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला की मौजूदगी में हुए सुझाव सत्र में मंडल अध्यक्ष खुल कर बोले-इसी तरह चलता रहा तो दोबारा सरकार नहीं आ पाएगी, अभी से संभल जाएंगे तो ठीक रहेगा। अधिकारी हमारी सुनते नहीं, दूसरी पार्टी के लोग अधिकारियों से लेकर मंत्रियों से अपने काम करवा लेते हैं और हम नहीं करवा पाते। मंडल अध्यक्ष तो बना दिए लेकिन कोई जिम्मेदारी तो दी जाए। किसी कार्यकर्ता का काम करवाने के लिए अधिकारी के पास चले जाएं तो घंटों बाहर इंतजार करना पड़ता है, काम होना तो दूर की बात है। अधिकारी, विधायक या मंत्री हमारे क्षेत्र में आने की हमें जानकारी तक नहीं होती। स्थिति काफी गंभीर बनी है, अगर नहीं सुधरी तो आने वाले चुनाव में इसका असर देखने को जरूर मिलेगा।
 
भाई भतीजावाद मंजूर नहीं, अधिकारी नहीं सुने तो रिपोर्ट करें 
सीएम मनोहर लाल बोले-हम खुद भी मानते हैं मंडल अध्यक्षों को मजबूत करने की जरूरत है, जिस पर काम चल रहा है। मंडल अध्यक्ष ही हमारा आइना है, जिसमें देख हम सुधर कर सकते हैं। लेकिन सरकार में भाई भतीजावाद बिलकुल मंजूर नहीं। कोई यह चाहता है कि डीसी रेट पर या अन्य किसी नौकरी में किसी का भाई या रिश्तेदार लगा दें, यह नहीं होगा।  कार्यकर्ता का कोई काम है या सामाजिक काम है और अधिकारी सुनवाई नहीं करते तो इसकी जानकारी दें।
 
सीएम ने 10 लोगों से पूछी उपलब्धियां, 27 ने बताईं
संवाद कार्यक्रम के दौरान सीएम ने पदाधिकारियों से सरकार की एक-एक उपलब्धि और एक-एक खामियां बताने को कहा, जिनकी पब्लिक में चर्चा है। इस पर करीब 27 लोगों ने एक-एक करके तमाम उपलब्धियां गिना दीं। खामियां गिनाते हुए कहा कि ढाणियों तक जाने वाले रास्ते कच्चे हैं। चुनी हुई पंचायतों को अभी तक बजट और अधिकार न मिलने का संदेश नेगेटिव जा रहा है।
 
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