पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Haryana
  • Panipat
  • पागलों का स्कूल बता लोगों ने किया था विरोध अब यहां स्पेशल बीएड

पागलों का स्कूल बता लोगों ने किया था विरोध, अब यहां स्पेशल बीएड

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पानीपत. अशक्त बेटे की शिक्षा के लिए अच्छा स्कूल नहीं मिला तो एक पिता ने ऐसे अन्य बच्चों के लिए स्पेशल स्कूल खोलने का बीड़ा उठा लिया। तमाम संघर्ष के बाद 4 करोड़ की लागत से ढाई मंजिला स्कूल तैयार हुआ और उसमें गरीब अशक्त बच्चों की निशुल्क शिक्षा शुरू करवाई। हालांकि संभ्रांत परिवार के बच्चों से कुछ शुल्क भी लिया जाता है। आज उस स्कूल में 75 अशक्त बच्चे शिक्षा पा रहे हैं। इस साल इसी स्कूल में स्पेशल बीएड कोर्स शुरू करने की तैयारी है।
अब तक केवल यहां शहर के ही आसपास के बच्चे रहे थे अब जिलेभर से बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। हम बात कर रहे हैं जींद के रोशनलाल गोयल की। हैफेड में सेक्शन ऑफिसर के पद पर कार्यरत रहे गोयल ने किस तरह और क्या-क्या संघर्ष झेलकर इस स्कूल को तैयार किया पढ़िएउन्हीं की जुबानी...
3 सितंबर1994 को छोटे बेटे अंकुर का जन्म हुआ। दो साल बाद पता चला कि वह मंदबुद्धि है। इलाज के दौरान कैथल के एक चिकित्सक ने कहा कि शिक्षा से ही कुछ सुधार हो सकता है। जींद में ऐसा कोई स्कूल नहीं था। रोहतक में अर्पण स्कूल का पता चला। वहां संपर्क किया। चिंता थी कि खुद रोहतक रहने लगे या बेटे को हॉस्टल छोड़ें। इसी ऊहापोह में चार माह तक टैक्सी से जींद-रोहतक अप डाउन हुआ।
इस दौरान ऐसे अन्य बच्चों के बारे में सोचकर मन व्यथित हुआ और उन्हें जिले में ही शिक्षा दिलाने का विचार दिमाग में घूमने लगा। तब अर्पण स्कूल के डायरेक्टर एचआर ढल ने मदद की और स्कूल खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई। सबसे पहले वर्ष 2002 में स्कूल खोलने का प्रस्ताव तैयार किया गया। जींद सेंट्रल जेसीज एजुकेशनल एवं चैरिटेबल ट्रस्ट बनाया गया।

टेंपरेरी स्कूल चलाने के लिए भवन किराए पर लिया, लेकिन आसपास के लोगों ने पागलों का स्कूल मानकर विरोध कर दिया। लोग मानते थे कि ऐसे स्कूल से हमारे बच्चों पर खराब असर पड़ेगा। वर्ष 2007 में छह महीने में तीन बार भवन बदलने पड़े लेकिन स्कूल शुरू नहीं हो पाया। इसके बाद मंशा देवी मंदिर परिसर का एक ब्लॉक किराए पर लिया और दो बच्चों से स्कूल शुरू हुआ। इसमें अंकुर और शहर का एक बच्चा शामिल था। तमाम प्रयास के बाद वर्ष 2008 में तत्कालीन डीसी और सरकार के सहयोग से अर्बन एस्टेट में 2 हजार वर्ग मीटर जगह रियायती दरों पर उपलब्ध हुई। 1 नवंबर 2008 को स्कूल निर्माण शुरू हुआ और 2011 में बिल्डिंग तैयार हो गई।
28 क्लासरूम वाली ढाई मंजिला इमारत तैयार करने में चार करोड़ रुपये खर्च हुए, यह कार्य कई लोगों के सहयोग से हो पाया। आज स्कूल में 75 बच्चे पढ़ रहे हैं। ये बच्चे पेंटिंग और स्पोर्ट्स में राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार भी जीत चुके हैं। ऐसे बच्चों को शिक्षक नहीं मिल पाने के कारण अगले सत्र से स्पेशल एजुकेशन (एचआई) स्पेशल एजुकेशन की बीएड शुरू करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए पूरे संसाधन उपलब्ध करवा दिए गए हैं
आगे की स्लाइड्स में देखें फोटोज...
खबरें और भी हैं...