सोनीपत. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच खुद को पार्टी की ओर से अगला सीएम पद का दावेदार दिखाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। तंवर लगातार हुड्डा के गढ़ में पैर जमाने में जुटे हैं। पहले रोहतक हुड्डा विरोधी को पार्टी ज्वाइन कराई। अब खरखौदा में तंवर ने विधानसभा में कांग्रेस के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़े दलित नेता पवन खरखौदा को कांग्रेस में शामिल किया। शुक्रवार को तंवर ने अपने 40वें जन्मदिन पर हुड्डा की ससुराल के विधानसभा क्षेत्र खरखौदा में जनसभा की। जनता के बीच में केक काटा।
नहीं पहुंचे हुड्डा समर्थक विधायक जयवीर
कार्यक्रम में हुड्डा के समर्थक खरखौदा विधायक जयवीर वाल्मीकि व जिले के चार अन्य विधायकों में से कोई शामिल नहीं हुआ। इस पर निशाना साधते हुए तंवर ने कहा कि यहां से वैसे तो कांग्रेस पार्टी का विधायक है, पर जो पार्टी के लिए काम करता है वह आंखों में रहता है। परिवर्तन संसार का नियम है। विधायक को सुस्त बताते हुए कहा कि कांग्रेस में देर है पर अंधेर नहीं। काम करने वाले कार्यकर्ता अब आगे आएंगे। जो आज मंच पर बैठे हैं, उनमें से अगले चार साल में कई संसद व विधानसभा में चुनकर जाएंगे। उन्होंने विधायक को कई बार निशाने पर लिया।
अबकी बार नहीं होगी नाइंसाफी
पवन खरखौदा को मौजूद विधायक जयवीर का घोर विरोधी माना जाता है। उन्होंने कहा कि जनता के समर्थन से ही पवन खरखौदा ने चुनाव में करीब 25 हजार वोट लिए थे। विधायक जयवीर को एक तरह से चुनौती देते हुए कहा कि इस बार कांग्रेस पवन के साथ नाइंसाफी नहीं करेगी। पवन जैसे कार्यकर्ताओं की जनता व कांग्रेस को बहुत जरूरत है।
भाषण में जाटों से दिखाई करीबी
अशोक तंवर की रैली में वैसे तो सभी जातियों के लोग थे, लेकिन जाट बाहुल्य इस विधान सभा क्षेत्र में उनकी कोशिश जाट समुदाय से ज्यादा करीबी दिखाने पर रही। अपने भाषण की शुरुआत सर छोटूराम व चौधरी टीकाराम को याद कर की। फिर दहिया खाप के प्रधान प्रताप दहिया का नाम भाषण में सात बार लिया। भाषण की समाप्ति पर कहा कि प्रताप दहिया ने दो साल पहले भी उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की शपथ लेने से पहले आशीर्वाद दिया था। वे पवन को भी आशीर्वाद देकर सेवा का मौका देंगे।
दहिया को महत्व देने का कारण
खरखौदा विधान सभा क्षेत्र दहिया खाप बाहुल्य है। इसके अलावा भूपेंद्र सिंह हुड्डा की ससुराल दहिया गोत्र में है। इस तरह से खाप के एक गुट के प्रधान प्रताप दहिया को अपने साथ जोड़कर भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ में खुद को मजबूत दिखाया। दूसरा हुड्डा के विरोधी खेमे के दलित नेता पवन को खुद कोे जोड़ लिया। विधान सभा चुनाव से पहले पवन दीपेंद्र हुड्डा के करीब था।