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कीमती कुंजी है रामायण की प्रश्नावली : दयानंद
स्वामीदयानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि हमारे जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं। उस समय में हमें पता नहीं चल पाता कि हमें किस रास्ते चलना है। भटकाव से उबरने के लिए श्रीराम शलाका प्रश्नावली या रामायण प्रश्नावली के रूप में कीमती कुंजी हमें परंपरा से प्राप्त हुई है।
बाबा गंगापुरी रोड स्थित शिव मंदिर में शनिवार को 18वें वार्षिकोत्सव में महाराज ने श्री रामायण पाठ की महिमा का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि मानव का अपना मन ही शांति अथवा अशांति का धाम है। यदि वह मन में शांति, धैर्य धारण करता है तो उसके जीवन में शांति रहती है। यदि उसके मन में अशांति, इंद्रियों में विकार, बेचैनी रहती है तो जीवन में कभी शांति नहीं सकती।
इंद्रियोंको करें वश में
उन्होंनेकहा कि सर्वप्रथम अपने मन पर ही नियंत्रण करना होगा। जो इंसान अपनी इंद्रियों को काबू में रखता है, वह कभी दुखी नहीं होता। मन का शांत होना भी जरूरी है। जो इंसान अपने मन पर नियंत्रण रखना सीख जाएगा, जीवन की कामयाबी भी पा सकता है। आज के दौर में हर कोई मोह माया के चक्कर में पड़कर भटकता रहता है। भगवान की भक्ति दिखाने के लिए ढोंग भी करता है। इंसान को प्रभु भक्ति जरूर करनी चाहिए। भक्ति परिवार के साथ रहकर भी हो सकती है। यह जरूरी नहीं कि इंसान भगवान की भक्ति के लिए घर का त्याग करे। समय चाहे कभी भी मिले, उसी समय में भगवान का नाम लें। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि समाज सेवी अशोक बांगा रहे। इस अवसर पर ईश कुमार राणा, प्रदीप उपाध्याय, संत लाल मोगा, दयानंद कुमार, हरीश टुटेजा, पुरुषोत्तम तनेजा, बलदेव पोपली मदन पांचाल मौजूद रहे।
पानीपत. शिवमंदिर में आयोजित कार्यक्रम में सुंदरकांड का पाठ करतीं महिलाएं।