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जीरो यूनिट पर भेजा 50 हजार का बिल

7 वर्ष पहले
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उत्तरहरियाणा बिजली वितरण निगम के एक और नए कारनामे से उपभोक्ताओं के पसीने छूट गए हैं। 60 दिनों के बाद आने वाला बिल, इस बार 26 दिनों के बाद ही भेज दिया। वह भी ढेरों खामियों के साथ। जीरो यूनिट की रीडिंग बता 50 हजार रुपए तक का बिल भेजकर समय पर बिल भरने वाले उपभोक्ताओं को बिजली निगम ने डिफाल्टर घोषित कर दिया। बिजली अधिकारी इसे बिल बनाने वाली एजेंसी की गलती बता रहे हैं। जांच के बाद एजेंसी पर जुर्माना ठोका जा सकता है।

बिजली के बिल हर दो महीने के बाद भेजे जाते हैं। जून और जुलाई महीने का बिल अगस्त में भरा था। अब अगला बिल अक्टूबर में आना था, लेकिन ये क्या। रविवार 21 सितंबर को शिवनगर वासियों को 26 दिनों का बिल थमा दिया गया है। बिल में यूनिट की रीडिंग शून्य लिखा है। आमतौर पर 1500 रुपए का बिल भरने वालों को 4000 रुपए तक का बिल दिया गया है। वहीं 10 हजार वालों को 50 हजार रुपए का। ऐसी ही गलती करने पर तीन महीने पहले निगम ने एजेंसी पर 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था।

बिल गलत बनाने में निगम का कोई फाल्ट नहीं है। जिए एजेंसी को जिम्मा सौंपा गया है, उसी ने ही बिल गलत बनाए हैं। एजेंसी को गलत बिल बनाने पर स्पष्टीकरण देना होगा। एजेंसी पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। जिन उपभोक्ताओं के गलत बिल बने हैं, कार्यालय में मुझसे आकर मिले। उपभोक्ताओं का हर तरह से सहयोग किया जाएगा।

-एमएसदहिया, एसई,बिजली निगम, पानीपत सर्कल

इससे पहले एजेंसी ने मॉडल टाउन में गलत भेजे थे सभी बिल

इससेपहले भी बिल बनाने वाली कंपनी ने माॅडल टाउन में गलत बिल बनाकर भेजे थे। कंपनी की गलती का खामियाजा उपभोक्ताओं को ही भुगतना पड़ा था। भले ही बिजली निगम ने विशेष रूप से बिल ठीक करने के लिए अधिकारियों को नियुक्त किया था। शिविर लगाकर बिल ठीक किए गए थे, लेकिन रोजाना भीड़ जमा होने के कारण परेशानी बढ़ गई थी। लोगों को बहुत धक्के खाने पड़े थे। उस समय बिजली निगम ने कंपनी को हजारों रुपए का जुर्माना भी लगाया था।

इस तरह से गलत बने हैं बिल

कुछदिनों पहले निजी कंपनी ने क्षेत्र के मीटरों की नए सिरे से इंडेक्सिंग की थी। इसमें मीटरों ट्रांसफार्मरों के लोड की जांच की गई थी। लोड के बाद संबंधित क्षेत्र के मीटरों को एक ट्रांसफार्मर से हटाकर दूसरे ट्रांसफार्मर से जोड़ा था। ट्रांसफार्मरों को भी एक फीडर से दूसरे फीडर पर जोड़ा गया था। कंपनी द्