इंटरव्यू ऑफ वीक
यूएसए के कैलिफोर्निया में कर चुकी हैं 10 साल अध्यापन का अनुभव। 2010 में वहां से लौटने के बाद दयाल सिंह पब्लिक स्कूल में संभाल रही हैं प्रधानाचार्या का पद।
इंटरव्यू ऑफ वीक
कैलिफोर्निया के अनुभव से माहौल बदलने का प्रयास
परिजन अपने बच्चों को जितना संभव हो सके, उतना ज्यादा समय दें। उन्हें खुलकर अपने मन की बात कहने दें।
दस साल यूएसए में शिक्षा जगत से जुड़े रहने के बाद अनुभव कैसा रहा?
इसदौरान मैंने पाया कि वहां पर ‘करके सीखने’ यानि अभ्यास के सिद्धांत पर काम किया जाता है। सबसे बड़ी बात कि वहां पर पढ़ने वाले और पढ़ाने वाले बीच एक स्वस्थ संवाद है। पहले ही दिन अध्यापक गेट पर बच्चों का स्वागत करता है, अपना नाम बताता है, उनका नाम पूछता है। साफ-सफाई अपना काम खुद करना, यहां तक कि वहां चपरासी, बस चालक और सहायक का भी अभिवादन करना और भी बहुत कुछ सिखाया जा रहा है।
यहांक्या प्रयोग किए ?
अबमैं यहां ‘ईस्ट एंड वेस्ट’ का सम्मिश्रण यानी भारतीय और पाश्चात्य संस्कृति का संगम करना चाहती हूं। बच्चा अपनी संस्कृति को भूलते हुए जमीन से जुड़ा रहे और पाश्चात्य संस्कृति में जो अच्छा है, उसका अनुकरण करें। हमारे यहां भी अध्यापक और बच्चों के बीच स्वस्थ संवाद को विकसित किया जा रहा है। उन्हें खुला माहौल दिया जा रहा है। कन्फेशन बॉक्स (गलती स्वीकारना) के माध्यम से बच्चे अपनी गलतियां स्वीकार करते हैं। अध्यापक स्कूल लगने के समय यानि 7:30 बजे से आधा घंटा पहले आते हैं और बच्चों का स्वागत करते हैं। बच्चों के मानसिक विकास के लिए विज्ञान मेला, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और अन्य स्पर्धाएं भी करवाई जाती हैं।
क्याइसके कोई परिणाम सामने आए ?
हां।ऐसे कई उदाहरण हैं। कई छोटे बच्चों ने पत्र मे लिखा कि उन्होंने दूसरे की पेंसिल या अन्य चीज चुराई। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। एक बच्ची ने स्वीकार किया कि मम्मी उसे डांटती हैं इसलिए उसने मम्मी की अनुपस्थिति में आत्महत्या का प्रयास किया। इस बात के बारे में बच्ची के माता-पिता नहीं जानते थे। उस बच्ची ने हमें बताया।
आपअपनी ओर से किए गए प्रयासों के बारे में क्या कहेंगी?
मैंखुद बच्चों और उनके माता-पिता के साथ अनौपचारिक वार्तालाप करती हूं। अपने स्टाफ सदस्यों के साथ भी बात की जाती है। उनके परिवार के सभी सदस्यों को बुलाकर कुछ मनोरंजक गतिविधियां और खाना-पीना किया जाता है। यहां तक कि बस चालक, सहायक, माली, सफाई कर्मियों से भी मैं नियमित अंतराल के बाद बात करती हूं। उनकी परेशानियां और खुशियां साझा करती हूं।
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