अविवाहित होकर भी एक बार दूल्हा बने
डॉ.मंगलसेन अविवाहित थे। हालांकि एक बार उन्हें नकली दूल्हा भी बनना पड़ा। हुआ यूं राजीव-लोंगोवाल समझौते के विरोध में ताऊ देवीलाल ने भाजपा के साथ मिलकर 1986 में न्याय आंदोलन छेड़ दिया। इसके बाद रोहतक की अनाज मंडी में बंसीलाल ने सभा करनी तय की। ताऊ देवीलाल ने हुडा काम्प्लैक्स में जनसभा बुलाई। सभा में भाग लेने के लिए डाॅ. मंगलसेन रोहतक रहे थे, लेकिन पानीपत में उनकी गाड़ी पुलिस ने जब्त कर ली। साथ ही, ड्राइवर गनमैन को हिरासत में ले लिया गया। डाॅ. मंगलसेन पानीपत में भाजपा नेता महेंद्र रंजन के घर चले गए। महेंद्र के घर डाॅ. मंगलसेन ने सफारी सूट पहना और इत्र छिड़क कर घर से बाहर निकले। उन्हें स्कूटर पर पानीपत की गलियों से शहर से बाहर ले जाया गया, जहां एक कार में बैठकर डाॅ. मंगलसेन रोहतक के लिए रवाना हुए। रास्ते में पुलिस ने गाड़ी रुकवाकर जांच पड़ताल की। डाॅ. मंगलसेन ने बताया कि वह दूल्हा हैं और उनकी रोहतक में शादी है। इस तरह वे आसानी से निकल आए।
गृहमंत्री बनकर किराए के मकान में रहे डॉ.मंगलसेन को शेरे हरियाणा कहा जाता था। 1982 में प्रदेश के गृहमंत्री 1987 में उप मुख्यमंत्री बने। बावजूद इसके वे डीएलएफ काॅलोनी में किराए का मकान लेकर रहते रहे।
विजेंद्र कौशिक | रोहतक
रोहतकशहर से सात बार विधायक प्रदेश के उप मुख्यमंत्री रहे डाॅ. मंगलसेन को सुप्रीम कोर्ट में यह साबित करना पड़ा था कि वह भारतीय हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद डाॅ. मंगलसेन रोहतक से सात बार केवल विधायक बने, बल्कि 1982 में प्रदेश के गृहमंत्री 1987 में उपमुख्यमंत्री भी बने। 1990 में उनके देहांत के बाद अब तक भाजपा रोहतक शहर से जीत हासिल नहीं कर सकी है।
शहर के लोगों, खासकर युवा पीढ़ी में बहुत कम जानते हैं कि एक बार मंगलसेन के भारतीय होने पर ही सवालिया निशान लगा दिए गए थे। 27 अक्टूबर, 1927 को उनका जन्म पाकिस्तान स्थित सरगोधा के झावरिया गांव में हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध के समय परिवार बर्मा चला गया, लेकिन बाद में वापस लौटना पड़ा। परिवार के साथ मंगलसेन जालंधर में आकर रहने लगे। बाद में देश के बंटवारे के बाद विस्थापितों के साथ रोहतक गए।
1957 में रोहतक से डाॅ. मंगलसेन ने जनसंघ की तरफ से पंजाब विधानसभा का चुनाव लड़ा और पाकिस्तान में विधायक रहीं कांग्रेस प्रत्याशी शन्नो देवी सहगल को हरा दिया। सहगल