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बिना फसल देखे कर डाला सर्वे

7 वर्ष पहले
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50 फीसदी नुकसान पर ही मिलेगा मुआवजा

पानीपत | सूखाग्रस्तक्षेत्रों का आंकलन करने निकली केंद्रीय टीम सिर्फ उन फसलों को ही कंसीडर कर रही है, जो 50 फीसद से अधिक बर्बाद हुई है। जिस किसी भी किसान की फसल इससे कम खराब हुई है, उसको इसमें शामिल नहीं किया जा रहा है।

रविवार को कोऑपरेटिव कारपोरेशन डेवलपमेंट, दिल्ली की एमडी वसुधा मिश्रा और हरियाणा कृषि विभाग के सचिव बिजेंदर सिंह सूखे की स्थिति का जायजा लेने पानीपत पहुंचे। इसराना के कैत गांव में किसानों से बातचीत की और जिला अधिकारियों से फसलों के बारे में पूछा। एडीसी आरएस वर्मा और जिला राजस्व अधिकारी वीएस बठला ने यहां की फसल के बारे में मिश्रा को बताया। इसके बाद गोहाना रोड से होते हुए यह टीम रोहतक निकल गई। टीम का रोहतक में स्टे के बाद शाम को चंडीगढ़ में उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने का कार्यक्रम था। डीआरओ वीएस बठला ने बताया कि पानीपत में सूखे के हालात नहीं हैं। 50 फीसद से कम बर्बाद हुई फसल को कंसीडर नहीं किया जा रहा है। हालांकि किसानों ने 60 फीसद फसल बर्बाद होने की दास्तां सुनाई।

भास्कर न्यूज | भिवानी/कैथल/पानीपत/अंबाला

सूखाग्रस्तक्षेत्रों का दौरा और फसल बर्बादी के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक तीन सदस्यीय टीम ने भिवानी, कैथल, अंबाला और पानीपत जिले के कई गांवों का दौरा किया। इस टीम में मुख्य रूप से आईएएस अधिकारी डॉ. रामानंद और डॉ. डीपी मलिक थे। टीम का कैथल जिले के कलायत के कई गांवों में किसानों ने विरोध भी किया। किसानों ने टीम के ऊपर खेतों में बिना जाए ही नुकसान के आंकलन करने का आरोप लगाया है।

कलायत के कई गांवों में इस टीम ने सबसे पहले जिले के गांव जमालपुर में प्रवेश किया। इसकी जानकारी मिलने पर भिवानी में बवानी खेड़ा खंड के 12 गांवों के किसानों ने अपनी बर्बाद फसलों की बानगी इस टीम के सदस्यों को दिखाई। इसके बाद ने टीम किरावड़, अलखपुरा, खरकड़ी सोहान, सरल, मिराण बड़वा आदि गांवों का दौरा किया।

इस दौरान टीम के सदस्यों ने किसानों की सूखे और बीमारी से बर्बाद हुई फसलों का जायजा लेते हुए किसानों को आश्वासन दिया कि वे अपनी सही रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेंगे। भारत सरकार द्वारा सूखाग्रस्त जिलों में सूखे की स्थिति का आंकलन करने के लिए आई टीम किसानों के खेतों को देखने ही नहीं गई। टीम ने जब उनके खेतों का सर्वे नहीं किया तो किसा