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सच्चे मन से करें प्रभु भक्ति : ज्ञानेश्वरी

7 वर्ष पहले
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पानीपत . श्रीरामशिशु विद्यामंदिर में प्रवचन सुनतीं माहिलाएं। (इनसेट में) प्रवचन देती ज्ञानेश्वरी देवी।

भास्कर न्यूज | पानीपत

मनुष्यऔर संत दोनों पागल हैं। मनुष्य पुत्र, घर, व्यापार नाम के लिए पागल होता है वहीं सच्चा संत भगवान के लिए पागल है। भगवान भी सच्चे संत और मनुष्य के लिए पागल हैं।

श्री राम शिशु विद्या मंदिर, नवां कोट बिरादरी के 55वें वार्षिक उत्सव के दूसरे दिन ब्रज भूमि से पहुंची कृपालु महाराज की प्रचारिका ज्ञानेश्वरी देवी ने प्रवचनों की अमृत वर्षा करते हुए भगवान की सच्चे मन से भक्ति करने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि मनुष्य जब जन्म लेता है तो रोता है, क्योंकि उसे मां के गर्भ में पीड़ा होती है, लेकिन जब प्रभु ने जन्म लिया, तो प्रभु मुस्कराते हैं। माता कौशल्या भगवान को हंसते हुए देखकर घबरा जाती हैं और प्रार्थना करतीं हैं कि हे प्रभु आप बालक रूप में आकर दर्शन दें। तब प्रभु ने बालक रूप में जन्म लिया।

ज्ञानेश्वरी महाराज ने कहा मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति का कोई कोई लक्ष्य जरूर होता है, उसकी भी कोई कोई इच्छा जरूर होती है। अगर किसी व्यक्ति से कोई उसका परिचय पूछे तो वह कहता है कि मैं व्यापारी हूं, मैं इस धर्म से हूं, मैं उस धर्म से हूं। कोई भी अपने आप को मनुष्य नहीं कहता। हम सब जीव आत्मा हैं और परमात्मा के अंश हैं। मनुष्य शरीर के रिश्तों में बंधे रहते हैं। जब हम भगवान के पास जाते हैं तब हम कहते हैं त्वमेव माता पिता त्वमेव, त्वमेव बंधु श्च सखा त्वमेवज् त्वमेव का मतलब है भगवान ही मेरे माता-पिता हैं।

महाराज ने कहा कि सिर्फ मुख से कहते हैं, हृदय से कोई भी व्यक्ति नहीं मानता। इस अवसर पर प्रधान शाम सुंदर बतरा, उपप्रधान वेद प्रकाश रेवड़ी, चरणजीत रेवड़ी, किशोर अरोड़ा, मुकेश खुराना, महेंद्र खुराना, कृष्ण गोपाल सेठी, सोमनाथ आहूजा, बलदेव ढंग, कृष्ण लाल खुराना, कोटू राम नारंग, आत्म प्रकाश सलूजा, राजेश वर्मा, सुनील सैनी तिलक खुराना मौजूद रहे।