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कवियों ने किया मातृ भाषा हिंदी का गुणगान
पानीपत . रंगमंचसाहित्य सभा की मासिक काव्य गोष्ठी में उपस्थित लोग।
भास्कर न्यूज | पानीपत
रविवारको हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर रंग मंच साहित्य सभा द्वारा मासिक-काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया। काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता कुंदन लाल जख्मी ने की। वहीं मुख्य अतिथि के रूप में ओमबीर सिंह भिवानी और अश्विनी कुमार सांवरिया ने शिरकत की। काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से हिंदी दिवस को विशेष बनाया। कमलेश कुमार पालीवाल ने कहा कि स्वागत करती हिंदी सबका बिखरा कुंकुम नारेली, धरती-जाई भाषा अपनी जननी अपनी बोली।
गुलाबपांचाल नेहिंदी की दुर्दशा दर्शाते पर कहा कि अपने घर में ही बेगानी हूं, गमगीन रूआंसा हूं, आयोजन का विषय महज हूं, मैं तो हिंदी भाषा हूं।
अजीतदीवाना नेकहा- जब कभी नए दौर की कहानी कहेंगे, लोग पानी को खून और खून को पानी कहेंगे, लोग इस दौर की खायतें सब बदल जाएंगी, बुजुर्गों की हिदायतें को पुरानी कहेंगे लोग।
सुलेखजैन नेहिंदी भाषा को बढावा देते हुए कहा कि भाग्यहीन है वो जिसको अपनी भाषा से प्यार नहीं भवन धराशायी हो जाता, हो जिसका आघार नहीं, सारे विश्व में हिंदी को स्थापित कर भाषा का कर्ज चुकाएंगे, हिंदी के फूलों में सदैव खुशबू का वास पाएंगें।
ओमबीरजांगड़ा नेकहा- हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर सोचता हूं, कुछ हिंदी पर लिखूं, हिंदी हिंदू हिन्दुस्तान पर, मैं हिंदी का बेटा हूं, तो जिंदगी भर लिखूं।
अजयजोशी नेकहा- कोई इंग्लिश संभक्त है, कोई उर्दू संभक्त, लेकिन हिंदी की कीमत को एक हिंदू भक्त है। ओमप्रकाश ने कहा फरिश्ता बन देव बन, शैतान बन भगवान बन, इंसान की आैलाद है तू इंसान बन। वहीं तिलकराज मदान, कृष्णलाल सोनी,नरेश लाभ, रमेश चंद्र, केसर कमल शर्मा सहित अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।