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गुरुओं की वाणी से भरते हैं जीवन में रंग : गुरविंदर शाह
गुरुकी वाणी से रंग लाए, गुरु कृपाल होए दुख जाए। अर्थात गुरुओं की वाणी जीवन में सुनहरे रंग भरती है और गुरुओं की कृपा होने पर जीवन के दुख दूर होते हैं। जीवन में गुरबाणी का धारण करना बहुत जरूरी है। गुरबाणी से मन को शांति मिलती है। इसका सिमरण करने से आपसी प्रेम भाईचारा बढ़ता है।
शहर के वार्ड-9 स्थित गुरुद्वारा शाह साहिब में आयोजित तीन दिवसीय 67वें सालाना यज्ञ समागम दशमी पर्व के पहले दिन गद्दीनशीन सरदार गुरविंदर शाह सिंह ने गुरबाणी सिमरण की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि गुरुओं द्वारा की गई वाणी में ही जगत की भलाई होती है। पिछले 66 सालों से गुरुद्वारा साहिब में यह समागम होता रहा है। उन्होंने बताया कि गृहस्थ जीवन में रहकर भी संत बना जा सकता है। यह जरूरी नहीं कि संत बनने के लिए गृहस्थ जीवन का त्याग करें।
समागम में भाग लेने के लिए जालंधर, सूरत, दिल्ली, सोनीपत, रोहतक, करनाल, हरिद्वार, पानीपत ग्वालियर से संगतें पहुंचीं। परम संत राजा योगी, संत सतनाम सिंह पिपली, सरदार गुरविंदर शाह सिंह, रागी जत्था डाॅ. देशदीप सिंह चंडीगढ़ भाई जितेंद्र सिंह मदान गुड़गांव ने संगतों पर शबद वाणियों की वर्षा कर की। शबद कीर्तन सत्संग के संगतों को गुरु का अटूट लंगर बरताया गया।
मीडिया प्रभारी जितेंद्र नारंग ने बताया कि गुरु नानक देवजी के ज्योति ज्योत गुरुपर्व के उपलक्ष्य में यह समागम मनाया जा रहा है। इसमें भाग लेने के लिए देशभर से संगतें पहुंच रही हैं। इस अवसर पर सरदार सुरेंद्र शाह सिंह, सरदार आनंद शाह सिंह, सतनाम सिंह, ईश्वर जुनेजा, हरीश, हरनाम सिंह चेतन दास मौजूद रहे।
सरदार गुरविंदर शाह सिंह
पानीपत. गुरुद्वाराशाह साहिब में अखंड पाठ करते ग्रंथी।