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हमारे अंदर की सहजता सरलता होती है भक्ति का आधार: ज्ञानेश्वरी
भक्तिका आधार हमारे अंदर की सहजता सरलता है। कलयुग में भक्ति बड़ी सरल है। अगर आप भक्ति प्राप्त करना चाहते हैं तो भगवान से सांसारिक वस्तुएं नहीं मांगनी चाहिए।
नगर निगम के वार्ड-8 स्थित श्रीराम शिशु विद्या मंदिर नवां कोट बिरादरी की ओर से आयोजित सत्संग समारोह में ज्ञानेश्वरी देवी ने मंगलवार को भक्ति की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि ईश्वर को प्राप्त करने के अनेक रास्ते हैं, लेकिन कलयुग में तो सिर्फ नाम से ही ईश्वर को पाया जा सकता है।
उन्होंने काग भुशुंडी का उदाहरण देते हुए कहा एक बार भगवान अपने भक्त काग भुशुंडी से बहुत प्रसन्न हुए और कहा मांगो तुम्हें ऋद्धि, सिद्धि या धन क्या चाहिए। इस पर काग भुशुंडी ने हाथ जोड़कर कहा प्रभु मुझे आपकी ऋद्धि-सिद्धि और सांसारिक वस्तुएं नहीं चाहिए। सांसारिक वस्तुएं यहीं रह जाएंगी। शास्त्र कहते हैं इच्छाओं का क्या है, इच्छाएं तो बढ़ती रहती हैं। इसलिए हमें भगवान से सांसारिक वस्तुए मांगकर भगवान का प्रेम मांगना चाहिए। अगर भगवान का प्रेम मिल जाए तो अन्य सांसारिक वस्तुओं की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। वास्तविक संत ऋद्धि-सिद्धि चमत्कारों का दिखावा नहीं करते। संतों का कार्य संसार रूपी कीचड़ से निकालकर मनुष्य का मन भगवान के श्री चरणों में लगाना है। वास्तविक गुरु की शरण में जाने से आपका काम हो, ऐसा नहीं हो सकता, लेकिन हम वास्तविक संतों को नहीं पहचानते। उन्होंने कहा कि नानक, मीरा, साईं समेत अनेक संत आए, लेकिन हमने उन्हें नहीं पहचाना। इन संतों ने जीवन पर्यंत कष्ट सहे, लेकिन दया करने का स्वभाव नहीं छोड़ा। आज हम इनके जाने के बाद इनकी पूजा करते हैं।
कथा के उपरांत मंदिर सभा प्रधान शाम सुंदर बतरा ने बताया कि बुधवार को अमृतवर्षा की पूर्णाहुति होगी। विशेष सभा 8 बजे से 11 बजे तक होगी। इसके पश्चात भगवान का लंगर प्रसाद वितरित होगा। इस अवसर पर सुरेंद्र रेवड़ी, वेद कुमार, जगदीश चुघ, मुकेश कुमार, चरणजीत, राजेश वर्मा, धर्मपाल अरोड़ा, अशोक खुराना, कालू महाराज, किशोर अरोड़ा, संजय जुनेजा, सुरेश मलिक मदन बतरा मौजूद रहे।
पानीपत. श्रीरामशिशु विद्या मंदिर में आयोजित सत्संग में उपस्थित श्रद्धालु।