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पानीपत को आज तक नहीं मिली महिला प्रतिनिधि
पानीपतका राजनीतिक इतिहास महिला जनप्रतिनिधियों से परे है। आजादी के बाद से लड़े गए 14 विधानसभा चुनाव में यहां आज तक कोई महिला चुनाव नहीं जीत सकीं। ऐसा नहीं है कि महिलाओं ने कभी प्रयास नहीं किया, लेकिन दूसरे स्थान से कभी पहले स्थान पर नहीं पहुंच सकी। वर्ष 1952 से लेकर 2005 तक पानीपत विधानसभा अस्तित्व में रहा, इसके बाद इसका खंडन कर दिया गया। पानीपत विधानसभा के पहले विधायक डॉ. परमानंद से लेकर बलबीर पाल शाह तक पुरुष ने ही राज किया।
पानीपत का वर्तमान स्वरूप 4 विधानसभा सीटों से बनता है। पानीपत शहर, पानीपत ग्रामीण, इसराना और समालखा विधानसभा सीट। आजादी बाद वर्ष 1952 से हुए हर विधानसभा चुनाव में पानीपत ने प्रतिनिधित्व किया। संयुक्त पंजाब में तीन बार वर्ष 1952, 1957 और 1962 में पानीपत विधानसभा के लिए चुनाव हुए। हरियाणा बनने के बाद समालखा विधानसभा का प्रादुर्भाव हुआ और वर्ष 2007 में परिसीमन होने के बाद पानीपत ग्रामीण और इसराना विधानसभा अस्तित्व में आए। वर्ष 2009 के चुनाव में पानीपत ग्रामीण से ओम प्रकाश जैन और इसराना से कृष्णलाल पंवार विधायक बने।
हरियाणा अलग होने के बाद बनी समालखा सीट
1नवंबर, 1966 को पंजाब से हरियाणा के अलग होने के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में समालखा विधानसभा सीट बनी। वर्ष 1967 के पहले चुनाव में रणधीर कांग्रेस के प्रत्याशी के सिंह को हराकर पहला विधायक बने। समालखा में अब तक 12 विधायक चुने जा चुके हैं, लेकिन यहां भी महिला सफल नहीं रहीं। इस बार इनेलो ने रामभतेरी को मैदान में उतारा है। देखना है कि रामभतेरी महिला के लिए खाता खोल पाती हैं या नहीं।
पानीपत विधानसभा 1952 से 2005 तक
यहांसे डॉ. परमानंद कांग्रेस से दो बाद विधायक चुने गए। वहीं भाजपा से जुड़े फतेह चंद विज पांच बार, कांग्रेस से हुकूमत राय एक और उनके बेटे बलबीर पाल शाह पांच बार विधायक बने। वर्ष 1996 के चुनाव में निर्दलीय ओम प्रकाश जैन ने बड़ा उलटफेर करते हुए बलबीर पाल शाह को हराकर पहली बार जीत दर्ज की। इसके बाद से लगातार तीन बार से बलबीर पाल शाह यहां से जीतते रहे हैं। 14 विधानसभा चुनाव में यहां एक भी महिला नहीं चुनी गईं।
वर्ष 2009 में पानीपत ग्रामीण से पूर्व स्पीकर सतबीर कादियान की प|ी बिमला कादियान को इनेलो से टिकट मिली, लेकिन वह निर्दलीय ओम प्रकाश जैन से वे चुनाव नहीं जीत सकी। 23 हजार 769