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वाणी ही प्रभु और शबद ही गुरु

7 वर्ष पहले
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\\\"दशमगुरु मेहर करी जब मेहर शाह को सिंह बनाया। पश्चिम दक्षिण में भिजवा कर गुरमति का प्रचार कराया। उन्हां दे पोते सिमरन शाह जी, सिमरन करके रुतबा पाया। झंग मुलतान थल इलाके नाम-दान स्नान दृढ़ाया। कच्ची कंध से काम लिया और दुश्मन को हैरान किया। पिता के वचनों से फिर उन्होंने प्राणों का बलिदान दिया।\\\' कुछ इस तरह की पंक्तियों से संदेश देते हुए वार्ड-9 स्थित गुरुद्वारा शाह साहिब में तीन दिवसीय दशमी पर्व का समापन गुरुवार को हुआ। श्री गुरु नानक देवजी के ज्याेति ज्योत के दिवस के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा शाह साहिब में रखे गए नौ अखंड पाठ का भी भोग डाला गया।

दरबार साहिब अमृतसर से आए भाई सरबजीत सिंह, शाहबाद से आए ज्ञानी हरजीत सिंह हरमन, गुड़गांव से जितेंद्र मदान, पिपली साहिब से संत राजा जोगी सतनाम सिंह और संत निर्मल सिंह खालसा ने कीर्तन कथा द्वारा संगतों को निहाल किया। समागम में मुंबई, सूरत, दिल्ली, ग्वालियर, जालंधर, लुधियाना, रोहतक, नागपुर, सोनीपत, पानीपत, बहादुरगढ़ से काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इन्होंने गद्दीनशीन सरदार गुरविंदर शाह सिंह से आशीर्वाद प्राप्त किया। गद्दीनशीन गुरविंदर शाह सिंह ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने अंदर सेवा भाव लाना होगा। हम संतों की प्रवचन तो सुन लेते हैं, लेकिन अमल कम करते हैं। खुद सेवा करके नाम जपने से ही पुण्य प्राप्त होता है।

गुरुनानक देवजी के ज्योति ज्योत दिवस पाकिस्तान के रोडू सुलतान में मनाया जाता था। पिछले 67 सालों से गुरुद्वारा शाह साहिब में मनाया जा रहा है। यह समागम तीन दिन चलता है। इस अवसर पर सुरेंद्र शाह सिंह, आनंद शाह सिंह, चेतनदास चुघ, सुंदरदास चुघ, भारतभूषण रेवड़ी, देवेंद्र रेवड़ी, विजय चौधरी, ईश्वर जुनेजा, सरदार नारायण सिंह, पवन रेवड़ी, हरीश गंगवानी, पाली, प्रदीप रेवड़ी, दर्शन रामदेव, किशोर रामदेव, सुनील रामदेव, जितेंद्र नारंग, सरदार सतनाम सिंह गुरुद्वारा शाह साहिब के समस्त सेवादार मौजूद रहे।

अमृतसर से भाई सरबजीत सिंह के रागी जत्था ने कीर्तन किया। उन्होंने कहा कि भगवान भाव का भूखा है। उन्होंने भगवान कृष्ण और दुर्योधन का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि बाणी ही प्रभु है और शबद ही गुरु है। शाहबाद मारकंडा से कथावाचक ज्ञान हरजीत सिंह ने कहा कि भ्रूण हत्या समाज में कलंक है। इस पर जागरूकता लानी होगी। बुरे काम से बचते हुए प्रभु के उपदेश प