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सत्य के संग को ही सत्संग कहते हैं : दिव्यानंद
जीवनका सदुपयोग करो, दुरुपयोग नहीं। इतना दुख काटने के बाद भी इंसान प्रभु को याद नहीं करता। प्रभु ने हमें इतना सुंदर जीवन दिया है। हमें नित्य सत्य का संग करना चाहिए। सत्य के संग को ही सत्संग कहते हैं। यह देवताओं को भी दुर्लभ है।
श्री प्रेम मंदिर की परमाध्यक्ष श्रीश्री 108 कांतादेवी महाराज की अध्यक्षता में मंदिर के वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित सत्संग में जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ महाराज ने भगवान के चरणों में जीवन यापन करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बड़े भाग मानुष तन पावा, सुर दुर्लभ सद्ग्रन्थन्हि गावा अर्थात 84 लाख योनियां काटकर तब जाकर यह मानुष तन मिलता है, इसीलिए जीवन का सदुपयोग करो, दुरुपयोग करो। सत्संग श्रवण करने का लाभ लेने के लिए देवता भी लालायित रहते हैं तो आप पीछे क्यों। भगवान ने आपको मौका दिया है जाओ और अपना जीवन सार्थक करो। भगवान सर्वव्यापक हैं। जैसे दूध में मक्खन होते हुए भी नजर नहीं आता ऐसे भगवान हर जगह व्यापक हैं पर नजर नहीं आते। इसीलिए उन्हें कभी भूलना नहीं चाहिए सदैव उनका मनन करना चाहिए। यही सभी संत कहते हैं, यही सभी ग्रंथ कहते हैं।
महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने भगवान की वंदना करते हुए कहा श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा, हे नाथ नारायण वासुदेवा। उन्होंने कहा कि जो भक्तजन गुरु एवं गाय की सेवा करता है और सब प्रकार से उनका अनुगमन करता है उस पर सन्तुष्ट होकर गऊएं उसे अत्यंत दुर्लभ वरदान देती हैं। गऊओं के साथ मन से भी कभी द्वेष करें। उन्हें सदा सुख पहुंचाए। इस अवसर पर मनोहर लाल मिगलानी, चंद्रभान वर्मा, परमजीत ढींगड़ा, हंसराज बजाज, अशोक जुनेजा, अरूण मिगलानी, राजू सेठी, दीनानाथ मुखीजा, विकास टुटेजा, राजिंद्र बरेजा, भजनीक ओम ढींगड़ा, सन्नी बरेजा, शाम बतरा, वेद प्रकाश, हरीश राम, प्रेम अरोड़ा, दीनानाथ मुखीजा, देसराज नारंग, कौशल, यशपाल अरोड़ा पिंटू दुआ मौजूद रहे।
प्रवचन के दौरान परम पूज्य स्वामी राधेश्याम द्विवेदी रामायणी ने कहा जो भक्तजन प्रभु श्री राम का स्मरण करते हैं, उनका अनुकरण करते हैं, वह सदैव सुखी रहते हैं। उन्हें दुख छू भी नहीं सकता, खुशियों का साया हमेशा बरकरार रहता है। श्री राधा अष्टमी उत्सव समिति के सदस्य नरेंद्र लखीना, पं. संजय वत्स, गौतम बधावन, विमल चानना, गगन शर्मा, पुन्नू राम, राजेश वत्स विक्की कत्याल ने कजरारे, मोटे-मोट नैन नजर लग जाए ... बाबा तेरा मेरा प्यार कभी बदले, नंदलाल तेरा मेरा प्यार कभी बदले.. गाकर सभी को भावविभोर कर दिया।
पानीपत. प्रेममंदिर का 59वां वार्षिकोत्सव में जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ महाराज के प्रवचन को सुनते श्रद्धालु।