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आजा हारां वालेया, उड़ीका मैनूं तेरियां...
पानीपत | मुकुटसिरमौर का मेरे चितचौर का... आजा हारां वालेया, उड़ीका मैनूं तेरियां... समेत अन्य भक्ति गीतों को सुन भक्त भगवान की भक्ति में मंत्रमुग्ध होकर नाच रहे थे। प्रवचनों में बह रही ज्ञान गंगा की लहरों में भी भक्तों ने श्रद्धा की डुबकी लगाई। भक्तों से मंदिर का प्रांगण खचाखच भरा था, फिर भी श्रद्धालुओं के चेहरों पर भीड़ में होने वाली परेशानी के भाव नहीं दिख रहे थे, बल्कि सत्संग में पहुंचने की खुशी थी।
मौका था श्री प्रेम मंदिर, पानीपत के वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में मंदिर की परमाध्यक्षा श्रीश्री 108 कांता देवी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित प्रेम सम्मेलन का। इसका शुभारंभ शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ महाराज द्वारा शुभ विक्रमी संवत् 2072 (वर्ष 2015-16) के श्री सनातन धर्म संगठन, पानीपत द्वारा तैयार की गई पर्वों की सूची के विमोचन के साथ हुआ। संगठन अध्यक्ष सूरज पहलवान, वेद प्रकाश शर्मा, डाॅ. महेंद्र शर्मा, सतीश गुप्ता, चंद्रभान वर्मा, मनोहर मिगलानी, रामलाल सुमन, लीलाकृष्ण भाटिया, कैलाश लूथरा सतनाम मिगलानी ने संतों का अभिनंदन किया। कांता देवी महाराज ने कहा कि परम संत गुरु कभी भी अपने शिष्य सेवक का बुरा नहीं चाहते।
स्वामी राधेश्याम द्विवेदी रामायणी ने कहा कि गुरु दरबार में आकर आप सभी का जीवन धन्य हो रहा है। इस अवसर पर ब्रह्म ऋषि पंकज वशिष्ठ महाराज, महामंडलेश्वर डाॅ. विवेकानंद, दयानंद सरस्वती, जयदयाल, कृष्ण राजपाल, रामनारायण मधुर, ओम ढींगड़ा, जेठानंद गंभीर, राजू भाटिया, वरिंद्र शाह (बुल्लेशाह), दर्शन लाल वधवा, प्रमोद खेड़ा, जगदीश ढींगड़ा, दीनानाथ मुखीजा, रमेश मल्होत्रा, हरीश चुघ, विकास टुटेजा, बंसीलाल तनेजा, बलदेव वधवा, अश्विनी सम्मी मौजूद रहे।
पानीपत . श्रीप्रेम मंदिर के वार्षिकोत्सव में श्रद्धालुओं को संबोधित करते स्वामी दयानंद सरस्वती महराज।