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हेपेटाइटिस बी सी की रिपोर्ट को पॉजिटिव से नेगेटिव बनाया
जानलेवाबीमारी हेपेटाइटिस बी सी से संबंधी एक युवक की पॉजिटिव रिपोर्ट को सिविल अस्पताल में फर्जी तरीके से नेगेटिव बना दिया गया। एमएस और सीएमओ के साइन होने के बाद रिपोर्ट सरकारी बैंक भी पहुंच गई, जहां युवक की नौकरी लगनी थी। लेकिन बैंक की ओर से कराई गई मेडिकल जांच ने अस्पताल की पोल खोल दी। चूंकि पैसे लेकर रिपोर्ट बनाई गई थी। मामला फंसता देख युवक के परिजन प्रदेश के उद्योग मंत्री रणदीप सुरजेवाला के पास पहुंच गए। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद युवक के पैसे तो वापस मिल गए, लेकिन रिपोर्ट को फर्जी तरीके से बदलने वाले लैब कर्मचारी की परेशानी बढ़ गई है।
मामले के मुताबिक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में क्लर्क के पद एक युवक का सिलेक्शन हुआ। नियुक्ति से पहले बैंक की ओर से कराई गई मेडिकल जांच में युवक की हेपेटाइटिस बी सी की रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। युवक के परिजनों ने इस रिपोर्ट को मानने से इनकार कर दिया। परिजनों की ओर से रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज कराने के बाद बैंक की ओर से सिविल अस्पताल से जांच कराने को कहा गया ताे मामले का खुलासा हो गया।
दूसरीबार जांच में दी नेगेटिव रिपोर्ट : सिविलअस्पताल में 9 जुलाई को की गई जांच में दोनों ही रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। फिर युवक ने 20 अगस्त को एक महिला लैब टेक्नीशियन की मदद से दोबारा जांच कराई। मिलीभगत कर रिपोर्ट निगेटिव बनाकर आगे भेज दी गई। एमएस डॉ. भूपेश चौधरी के हस्ताक्षर होने के बाद फाइल सीएमओ डॉ. इंद्रजीत धनखड़ के पास पहुंची। यहां से भी साइन होने के बाद निगेटिव रिपोर्ट लेकर युवक ने बैंक में जमा कर दी। रिपोर्ट देखकर बैंक की ओर से करवाई गई युवक की पॉजिटिव रिपोर्ट सीएमओ के पास भेजी गई तो मामले की जांच शुरू हो गई।
मंत्री के फोन के बाद वापस मिली रकम
बताया जा रहा है कि इसके लिए युवक के परिजनों ने अस्पताल कर्मचारियों को माेटी रकम दी थी। नौकरी नहीं लगने और रुपए जाने के बाद युवक के परिजन मंत्री रणदीप सुरजेवाला से मिलने पहुंचे। मंत्री ने सीएमओ को फोन किया तो अस्पताल में हड़कंप मच गया। सीएमओ ने तीन डॉक्टरों डॉ. आलोक जैन, डॉ. प्रीति और डॉ. श्यामलाल को मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंप दी थी। मामला बिगड़ने के बाद पैसे युवक के परिजनों को वापस कर दिए गए। डॉक्टरों की जांच में महिला लैब टेक्नीशियन सुशीला को दोषी ठहराया जा रहा है।
हेपेटाइटिस-सी
एकसंक्रामक रोग, जो हेपे