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बच्चों को सुगम एवं रुचिपूर्ण तरीके से दें शिक्षा : धर्मदेव
शिक्षाको बढ़ावा देना है तो कमजोर छात्रों को साथ लेकर चलना होगा। स्कूल कंडिशन लगा देते हैं कि वह जिन छात्रों के 90 फीसदी अंक होंगे, उन्हीं को एडमिशन मिलेगा, लेकिन कभी टीचर कमजोर छात्रों की कमी को दूर करने का प्रयास नहीं करते। ये बात डीएवी पब्लिक स्कूल थर्मल के डायरेक्टर धर्मदेव विद्यार्थी ने कही। वे सोमवार को डीएवी विद्यालयों के प्रिंसिपल की दो दिवसीय कार्यशाला ‘एमिंग फाॅर एक्सीलेंस’ (बच्चों का अच्छी शिक्षा कैसी दें) में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि कुछ छात्रों के पेरेंट्स पढ़े-लिखे होते हैं। इसका उन छात्रों को सहयोग मिलता है, लेकिन जिन छात्रों के पेरेंट्स पढ़े-लिखे नहीं होते, उनको सहायता नहीं मिलती, इस कारण वह पिछड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि टीचर छात्रों को टॉपिक इस तरह पढ़ाएं कि उसको समझ आए। कार्यशाला में रिसोर्स प्रश्न के रूप में आई असिस्टेंट डायरेक्टर डीएवी सेंटर फाॅर एकेडमिक एक्सीलेंस नई दिल्ली से रश्मि चैरी ने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे नवीन बदलाव के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में नई तकनीक का प्रयोग हो रहा है। इसलिए शिक्षकों को नई तकनीकों को सीखनी होगी, ताकि वह छात्रों को बता सकें। इस कार्यशाला में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा उत्तराखंड के विद्यालयों के प्रिंसिपल, डीएवी फरीदाबाद के प्रिंसिपल एसएस चौधरी, प्रिंसिपल वीके धवन, वीके कासिव, नीरज शर्मा, पीसी पुरोहित, मदान, केएल खुराना ऋतु दिलबागी भी मौजूद रहीं।
थर्मल. डीएवीस्कूल में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में उपस्थित उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड के प्रिंसिपल।